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सचिवालय की फर्जी नौकरी, पटना में डमी ट्रेनिंग, जेल से धमकी... ऐसे चला बक्सू बाबा एकेडमी का नौकरी सिंडिकेट

By Shivanand Rai Edited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 08 Sep 2026 05:54 PM (IST)

ऊँ श्री बक्सू बाबा एकेडमी ने गाजीपुर से बिहार-झारखंड तक सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी की। अभ्यर्थियों ...और पढ़ें

गाजीपुर नौकरी ठगी: बक्सू बाबा एकेडमी का फर्जीवाड़ा, पटना में डमी ट्रेनिंग और जेल से धमकी।

गाजीपुर नौकरी ठगी: बक्सू बाबा एकेडमी का फर्जीवाड़ा, पटना में डमी ट्रेनिंग और जेल से धमकी।

HighLights

  1. बक्सू बाबा एकेडमी ने सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगी की।

  2. पटना के सरकारी भवन में डमी प्रशिक्षण और फर्जी नियुक्ति पत्र।

  3. सरगना की 4.40 करोड़ संपत्ति जब्त, पीड़ितों पर दबाव जारी।

जागरण संवाददाता, गाजीपुर। रेवतीपुर के नगदिलपुर स्थित ऊं श्री बक्सू बाबा एकेडमी से संचालित नौकरी ठगी का नेटवर्क महज फर्जी नियुक्ति पत्र बांटने तक सीमित नहीं था। मुकदमों की केस डायरी में दर्ज घटनाओं ने इस पूरे खेल की परतें खोल दी हैं। सरकारी नौकरी का भरोसा दिलाने के लिए अभ्यर्थियों को पटना के सरकारी भवन तक ले जाया गया।

वहां डमी प्रशिक्षण कराया गया और बैंक खाते तक खुलवाए गए। नौकरी नहीं मिली तो रकम वापस मांगने पर बंधक बनाने और धमकी देने के आरोप सामने आए। सरगना विनोद कुमार गुप्ता के जेल जाने के बाद भी पीड़ितों पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाए जाने का मामला दर्ज हुआ। प्रशासन ने सरगना की 4.40 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली।

इस नेटवर्क का दायरा गाजीपुर से निकलकर बिहार और झारखंड तक फैला था। गाजीपुर के अलावा देवरिया, बिहार के पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, लखीसराय, रोहतास, नालंदा और भोजपुर तथा झारखंड के रांची तक के अभ्यर्थी इसके शिकार बने। सचिवालय में लिपिक समेत अन्य सरकारी पदों पर सीधे नौकरी लगवाने का झांसा देकर युवाओं से लाखों रुपये लिए गए। रकम जुटाने के लिए किसी ने जमीन बेची तो किसी ने कर्ज लिया।

सरकारी भवन में महीने भर डमी ट्रेनिंग, बैंक खाते भी खुलवाए

सिंडिकेट ने फर्जीवाड़े को सरकारी व्यवस्था जैसा दिखाने के लिए बाकायदा प्रशिक्षण का पूरा तंत्र खड़ा किया था। अभ्यर्थियों को पटना के विश्वेश्वरैया भवन तक ले जाया गया। लखीसराय की आरती कुमारी को एक माह और मुजफ्फरपुर की रूमी कुमारी को कई दिनों तक फर्जी प्रशिक्षण दिलाया गया। उन्हें फर्जी पहचान पत्र और नियुक्ति पत्र दिए गए और अधिकारियों से मुलाकात कराने का भरोसा दिलाया गया।

सरकारी भवन में दस्तावेजों की जांच के दौरान फर्जीवाड़े का राज खुला। इसके अलावा अभ्यर्थियों के बैंक खाते खुलवाकर उन्हें सरकारी वेतन खाते के रूप में प्रस्तुत किया गया। खाता सत्यापन के नाम पर भी अतिरिक्त रकम लिए जाने का आरोप है। ठगी की रकम को एक ही खाते में रखने के बजाय अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआइ के माध्यम से मंगाया गया। पूर्वी चंपारण के सुगौली क्षेत्र के गुड्डू कुमार से लिए गए पांच लाख रुपये के मामले में रकम दक्षिण भारत स्थित चेट्टुपुझा ऐलिस ज्वैलरी के खाते में भिजवाए गए।

नौकरी नहीं मिली तो खुला सिंडिकेट का दूसरा चेहरा

नौकरी नहीं मिलने पर जब अभ्यर्थियों ने रकम वापस मांगनी शुरू की तो विवाद बढ़ गया। लखीसराय की आरती कुमारी और मुजफ्फरपुर की रूमी कुमारी को एकेडमी के कार्यालय में 12 से 14 घंटे तक बंधक बनाया गया। रांची की मीना कुमारी और रोहतास की जुली कुमारी को भी बंधक बनाया गया और धमकाया गया। पूर्वी व पश्चिमी चंपारण के कई युवक भी इस जाल में फंसे।

सुगौली के श्यामपुर बरवां निवासी गुड्डू कुमार व अंजय कुमार, रामगढ़वा के नवीन ठाकुर तथा पश्चिमी चंपारण के बानुछापर निवासी रवि कुमार ने भी मुकदमा कराया। उन्हें तीसरे बैच में नौकरी लगने और जल्द सचिवालय से बुलावा आने का भरोसा देकर महीनों तक टाला जाता रहा।

गाजीपुर के रेवतीपुर क्षेत्र के नगदिलपुर व आसपास के गांवों से विदेशी चौधरी, रोहित कुमार, विजय कुमार चौधरी, धन्नू कुमार चौधरी और अजय कुमार चौधरी ने मुकदमे दर्ज कराए। मुहम्मदाबाद के जफरपुरा निवासी अभिनव कुमार तथा रेवतीपुर निवासी प्रीतम कुमार तिवारी और घनश्याम गौरव तिवारी ने भी मुकदमें कराए। देवरिया के रुद्रपुर क्षेत्र के गुलाम कादिर ने भी शिकायत की।

बिहार में पूर्वी चंपारण के सुगौली व रामगढ़वा, पश्चिमी चंपारण के बानुछापर, मुजफ्फरपुर के करजा व शाहपुर मरीचा, लखीसराय के चानन, रोहतास के बिक्रमगंज, नालंदा के गिरियक और भोजपुर के जगदीशपुर तक इसके पीड़ित मिले हैं। झारखंड के रांची के रातू क्षेत्र की मीना कुमारी भी शिकायतकर्ता हैं।

सरगना जेल गया, फिर भी पीड़ितों पर जारी रहा दबाव

विनोद कुमार गुप्ता के जेल जाने के बाद भी नेटवर्क से जुड़े लोगों ने भी पीड़ितों को डराया-धमकाया। श्याम कुमार की तहरीर पर दर्ज मुकदमे के अनुसार, 19 फरवरी 2025 को जिला जेल से फोन कर मुकदमे में सुलह करने और केस वापस लेने का दबाव बनाया गया। बाहर मौजूद नकाबपोश लोगों के जरिये पीड़ित के स्वजन को धमकाने का भी आरोप है।

इस मामले में शहर कोतवाली में अलग मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने विनोद कुमार गुप्ता को गैंग लीडर बताते हुए उसके सहयोगियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की। मुकदमों में गाजीपुर के नगदिलपुर, रेवतीपुर, गहमर और दिलदारनगर क्षेत्र के कई लोगों के नाम आरोपितों के रूप में दर्ज किए गये ।