'साहब मेरे पति कोमा में है, इलाज के लिए संपत्ति बेचने का हक दे दो', पीड़िता ने हाई कोर्ट से लगाई गुहार
गाजियाबाद में एक पत्नी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से कोमा में चल रहे पति की संपत्ति बेचने की अनुमति मांगी है ताकि उनके इलाज का खर्च उठाया जा सके।
-1791454008141_m.webp)
पत्नी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से कोमा में चल रहे पति की संपत्ति बेचने की अनुमति मांगी है। AI जनरेटेड
HighLights
पत्नी ने कोमा में पति के इलाज के लिए संपत्ति बेचने की अनुमति मांगी।
हाई कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड से पति की स्थिति जांचने का आदेश दिया।
गाजियाबाद सीएमओ ने विशेषज्ञों की रिपोर्ट हाई कोर्ट को भेज दी है।
मदन पांचाल, गाजियाबाद। साहब पति कोमा में है। इलाज के लिए पैसा नहीं है। संपत्ति बेचकर ही इलाज का खर्च वहन किया जा सकता है। ऐसे में उनकी संपत्ति को बेचने का हक दे दो। जी हां पत्नि ने हाई कोर्ट से कोमा में चल रहे पति के नाम दर्ज संपत्ति को बेचने की अनुमति मांगी हैं।
कोमा में पति की हालत को देखते हुए हाई कोर्ट गंभीर है। इतना ही नहीं हाई कोर्ट ने तीन विशेषज्ञों के मेडिकल बोर्ड से जांच कराते हुए स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगी है। मामला हाई कोर्ट का आते ही सीएमओ ने मेडिकल बोर्ड गठित करते हुए जांच रिपोर्ट हाई कोर्ट को भेज दी है।
मेडिकल बोर्ड गठित
जानकारी के अनुसार, सितंबर 2024 से कोमा में चल रहे गाजियाबाद निवासी विजय कुमार की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति जानने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर यह मेडिकल बोर्ड गठित किया गया।बोर्ड ने जांच करके रिपोर्ट हाई कोर्ट को भेज दी है।
कोर्ट ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी गाजियाबाद को न्यूरो फिजिशियन, न्यूरो सर्जन और एक अन्य चिकित्सक को शामिल कर बोर्ड से जांच कराने के निर्देश दिए थे। बोर्ड ने यह जांच कि है कि विजय कुमार वास्तव में कोमा की अवस्था में हैं या नहीं और निकट भविष्य में उनके होश में आने की संभावना है अथवा नहीं।
तथ्य स्पष्ट किया जाना जरूरी
मामला रिट-सी संख्या 39760/2026, अनीता बनाम उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य से जुड़ा है। 30 सितंबर 2026 को पारित आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि पहले यह मूल तथ्य स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि विजय कुमार लगातार कोमा में हैं या नहीं। इसके लिए तीन चिकित्सकों का बोर्ड बनाकर उनकी जांच कराने का निर्देश दिया गया।
दस्तावेज के मुताबिक, विजय कुमार दिल्ली परिवहन निगम में संविदा पर परिचालक के रूप में काम करते थे। उनके मस्तिष्क में रक्तस्राव होने के बाद तीन सितंबर 2024 को वह कोमा में चले गए।
5 सितंबर 2024 को उन्हें यशोदा अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर, नेहरू नगर में भर्ती कराया गया था। बाद में उनके मस्तिष्क की सर्जरी भी हुई, लेकिन होश नहीं आया।
पति के इलाज का खर्च उठाना मुश्किल
पत्नी अनीता ने कोर्ट को बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और पति के इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। वह इलाज के लिए पति की संपत्ति का कुछ हिस्सा बेचने की अनुमति चाहती हैं। कोर्ट ने पहले पति की चिकित्सकीय स्थिति की पुष्टि को जरूरी माना है।
सीएमओ के पत्र के अनुसार, गाजियाबाद के राजकीय अस्पतालों में न्यूरो फिजिशियन और न्यूरो सर्जन उपलब्ध नहीं होने के कारण लाला लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज, मेरठ के स्तर से विशेषज्ञ उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।
सीएमओ डॉ. सचिन चंद्र वैश्य ने बताया कि 6 अक्टूबर को मेडिकल बोर्ड द्वारा विजय कुमार की चिकित्सकीय जांच की गई और हाई कोर्ट को रिपोर्ट भेज दी गई है। रिपोर्ट 9 अक्टूबर तक हाई कोर्ट में प्रस्तुत करनी है।
