गाजियाबाद पुलिस का बड़ा फैसला, अब FIR दर्ज कराने से पहले PLV टेबल पर आएंगे दोनों पक्ष
गाजियाबाद में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और पुलिस ने अदालती मुकदमों का बोझ कम करने के लिए एक नई पहल शुरू की है।

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड
HighLights
गाजियाबाद में अदालती मुकदमों का बोझ कम करने की पहल।
प्रत्येक थाने में पेरा लीगल वालंटियर (पीएलवी) तैनात किए जाएंगे।
गैर-गंभीर मामलों में एफआईआर से पहले पीएलवी मध्यस्थता करेंगे।
हसीन शाह, गाजियाबाद। अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ कम करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) और पुलिस प्रशासन ने ने पहल शुरू की है। जिले के प्रत्येक थाने में पेरा लीगल वालंटियर (पीएलवी) तैनात किए जाएंगे।
अब थाने में किसी भी गैर-गंभीर मामले की शिकायत पहुंचने पर प्रथम दृष्टया एफआइआर दर्ज करने के बजाय दोनों पक्षों को पीएलवी के पास भेजा जाएगा। पीएलवी की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच निश्शुल्क समझौता कराने का प्रयास किया जाएगा।
यदि समझौता सफल रहता है तो मामला वहीं खत्म कर दोनों पक्षों का राजीनामा लिखवाकर घर भेज दिया जाएगा। अगर दोनों पक्ष नहीं मानते हैं तो पुलिस मुकदमा दर्ज करेगी।
कौन से हैं वो मामले?
बृहस्पतिवार को पुलिस लाइन स्थित परमजीत हॉल में आयोजित बैठक में इस व्यवस्था की रूपरेखा तय की गई। बैठक में पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नेहा बनौधिया और सहायक पुलिस आयुक्त (महिला अपराध) सभी पुलिसकर्मियों को इस संबंध में जानकारी दी।
इसमें मारपीट, घरेलू विवाद, संपत्ति विवाद, मकान मालिक-किराएदार विवाद, धन की वसूली, पति-पत्नी के विवाद, तलाक के मामले, बच्चों की कस्टडी, भरण-पोषण, बकाया वेतन, नौकरी से गलत तरीके से निकालना, सड़क दुर्घटना मुआवजा, चेक अनादर, बिजली चोरी और बैंक व वित्तीय लेन-देन से जुड़े विवादों को पीएलवी की टेबल पर लाया जाएगा। हालांकि, हत्या, डकैती, लूट और चोरी जैसे गंभीर और जघन्य अपराधों को इससे बाहर रखा गया है।
