'मुआवजा नहीं जमीनें वापस करो, वरना लेंगे जलसमाधि', किसानों का 26वें दिन धरना जारी; GDA को दी चेतावनी
गाजियाबाद के कनावनी गांव में किसान अपनी जमीन वापस पाने की मांग को लेकर 26 दिनों से धरना दे रहे हैं।

कनावनी में किसानों का धरना जारी।
HighLights
कनावनी गांव में किसानों का 26 दिनों से धरना जारी।
किसान जीडीए से मुआवजा नहीं, जमीन वापस चाहते हैं।
मांगें न मानने पर जलसमाधि लेने की चेतावनी दी।
जागरण संवाददाता, साहिबाबाद। गाजियाबाद के कनावनी गांव में अपनी मांगों को लेकर किसानों का धरना मंगलवार को 26वें दिन भी जारी रहा। किसानों का कहना है कि अब वे अपनी जमीन जीडीए को किसी भी हाल में देने के लिए तैयार नहीं हैं।
जमीन राजस्व रिकॉर्ड में किसानों के नाम तत्काल बहाल किए जाएं। यदि उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं तो वह जलसमाधि लेने के मजबूर होंगे।
किसानों का कहना है कि जीडीए द्वारा इस भूमि पर गाजियाबाद-इंदिरापुरम विस्तार योजना लाए जाने की प्रक्रिया की जा रही थी, जिसके तहत किसानों को मुआवजा दिया जाना था।
'राजस्व रिकॉर्ड में तत्काल बहाल हों किसानों के नाम'
हालांकि निर्धारित समय-सीमा में अवार्ड घोषित नहीं होने के बाद किसान अब अपनी जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं। किसान प्रवीण नागर का कहना है कि अवार्ड घोषित नहीं होने के बाद अब किसानों की मांग है कि उनकी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में उनके नाम तत्काल बहाल किए जाएं।
किसानों ने प्रशासन से अपील की है कि स्थिति गंभीर होने से पहले उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए। मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होने तक उनका धरना लगातार जारी रहेगा। धरने के दौरान चतर सिंह नागर, प्रकाश नागर, श्रीचंद नागर, मथन सिंह नागर, कैलाश नागर आदि मौजूद रहे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या?
किसान प्रवीण नागर का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में प्राधिकरण को छह माह के अंदर गांव की भूमि के संबंध में वैध अवार्ड घोषित करने का समय दिया गया था।
छह माह की निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बावजूद प्राधिकरण गांव के लिए अवार्ड घोषित नहीं कर सका। किसानों का कहना है कि अब वे मुआवजा नहीं, अपनी जमीन वापस चाहते हैं।
किसानों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई छह माह की समय-सीमा भी पूरी हो चुकी है। प्राधिकरण निर्धारित अवधि में गांव की भूमि के लिए अवार्ड नहीं बना सका है।
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