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    कहीं नन्हा कांवड़िया, कहीं एक पैर से भक्त... कांवड़ मार्ग पर दिखा आस्था का अद्भुत रंग

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 05:27 AM (GMT+05:30)

    गाजियाबाद में कांवड़ यात्रा के दौरान दिव्यांग कंवरपाल 27 साल से लगातार कांवड़ ला रहे हैं, जो शिव भक्ति का अद्भुत उदाहरण है। पांच साल के प्रिंस और भव्य ...और पढ़ें

    गाजियाबाद में कांवड़ यात्रा के दौरान दिव्यांग कंवरपाल 27 साल से लगातार कांवड़ ला रहे हैं। जागरण

    गाजियाबाद में कांवड़ यात्रा के दौरान दिव्यांग कंवरपाल 27 साल से लगातार कांवड़ ला रहे हैं। जागरण

    HighLights

    1. दिव्यांग कंवरपाल 27 साल से लगातार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं।

    2. पांच साल का प्रिंस दूसरी बार कांवड़ यात्रा में शामिल हुआ।

    3. महाकाल झांकी और झूला कांवड़ ने भक्तों का ध्यान खींचा।

    दीपा शर्मा, गाजियाबाद। भोले के प्रति मन में सच्ची आस्था हो तो कोई भी परिस्थिति भक्तों को अपने कैलाशपति की भक्ति से विमुख नहीं कर सकती है। चाहें शरीर के अंगों की दिव्यांगता हो या उम्र कोई भी स्थिति भक्तों को अपने परमेश्वर से दूर नहीं रख सकती है।

    ऐसे ही अनगिनत उदाहरण हर रोज कांवड़ मार्ग पर देखने को मिल रहे हैं। जहां शरीर से दिव्यांग, पांच से 75 साल के कांवड़िये शिव की भक्ति में मग्न अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। कांवड़ मार्ग पर बना शिवमय वातावरण सभी में एक निराला उत्साह बनाए हुए हैं। वैसे ही कांवड़िये रविवार को कांवड़ मार्ग पर देखने को मिले।

    दिल्ली के महरौली के रहने वाले 53 वर्षीय कंवरपाल पिछले 27 साल से लगातार कांवड़ ला रहे हैं। कंवरपाल का कहना है कि 2014 में उनके पैर के ऊपर एक लोहे का भारी पाइप गिर गया था। जिसके बाद 2015 में उन्हें पैर कटवाना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने कांवड़ लाना एक बार भी नहीं छोड़ा।

    उनको कोई मनोकामना नहीं होती। बस भोले की भक्ति में वह हर साल अकेले ही कांवड़ यात्रा करते हैं। कंवरपाल का कहना है कि उन्हें कांवड़ यात्रा करने में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होती है। शिव की कृपा से हर साल कांवड़ यात्रा सफल होती है।

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    पांच साल का भोले बना आकर्षण का केंद्र

    कांवड़ मार्ग पर छोटी सी कांवड़ उठाए पांच साल का नन्हा कांवड़िया प्रिंस अनवरत अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा है। दिल्ली का रहने वाला कांवड़िया दूसरी बार कांवड़ यात्रा कर रहा है। पहली बार सफलता पूर्वक बिना किसी परेशानी के कांवड़ यात्रा पूरी की तो प्रिंस और परिवार का उत्साह बढ़ गया। अब वह दूसरी साल भी अपने परिवार के साथ कांवड़ ला रहा है।

    महाकाल की झांकी और झूला कांवड़ ने खींचा ध्यान

    कांवड़ मार्ग पर शनिवार को भगवान शिव के महाकाल और नीलकंठ स्वरूप में सजी भव्य झांकियों और झूला कांवड़ ने कांवड़ मार्ग पर विशेष तौर पर अपनी ओर ध्यान आकर्षित किया। झूला कांवड़ काफी भव्य तरीके से सजाई गई हैं। वहीं झांकियों के साथ चल रहे शिवभक्तों ने एक जैसे परिधान धारण किए हुए हैं।

    तेज संगीत, डमरू की थाप और शिव भजनों के बीच कांवड़िये नृत्य करते हुए आगे बढ़ रहे थे। कई समूहों ने अपनी कांवड़ और झांकियों को विशेष थीम के आधार पर सजाया है। किसी कांवड़ पर विशाल त्रिशूल और डमरू नजर आया तो किसी पर कैलाश पर्वत का दृश्य उकेरा गया।

    रुद्र, रुद्रेश्वर और विश्वनाथ के जयघोष के साथ आगे बढ़ते कांवड़ियों के ये अनूठे अंदाज राहगीरों और स्थानीय लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बने रहे। कांवड़ मार्ग पर कदम-कदम पर शिवभक्ति का ऐसा रंग दिखाई दे रहा है, मानो पूरा मार्ग स्वयं कैलाश धाम में बदल गया हो।

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