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हनुमान अंश की सफलता के बाद बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली पर तेजी से बढ़े श्रद्धालु, 15 गुना बढ़ी भक्तों की संख्या

Published: Mon, 14 Sep 2026 08:16 PM (IST)Updated: Mon, 14 Sep 2026 08:31 PM (IST)

फिल्म 'हनुमान अंश' की सफलता के बाद संत बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली अकबरपुर में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली में सोमवार शाम आरती में उपस्थित श्रद्धालु।

बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली में सोमवार शाम आरती में उपस्थित श्रद्धालु।

HighLights

  1. 'हनुमान अंश' फिल्म की सफलता से भक्तों की संख्या बढ़ी।

  2. अकबरपुर स्थित बाबा की जन्मस्थली पर 15 गुना वृद्धि।

  3. धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा, सरकार कर रही विकास कार्य।

जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र संत बाबा नीब करौरी के जीवन पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' की सफलता का बड़ा असर अब उनकी जन्मस्थली पर दिखाई दे रहा है। जिले के अकबरपुर गांव स्थित बाबा के पैतृक आवास और मंदिर के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है।

पिछले एक महीने में यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में 15 गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे भविष्य में यहां धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं बढ़ गई हैं। सरकार गांव में पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने के लिए पहले से ही प्रयास कर रही है। वृंदावन स्थित बाबा के आश्रम और समाधि स्थल पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है।

संत बाबा नीब करौरी के देश-विदेश में लाखों भक्त हैं। इनमें एप्पल कंपनी के संस्थापक स्टीव जाब्स, फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और हालिवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स भी शामिल हैं।

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बाबा का जन्म गांव अकबरपुर में वर्ष 1900 में हुआ था। यहां उनका पैतृक घर और मंदिर है। प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से अकबरपुर को धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर रही है, जहां करोड़ों रुपये की लागत से बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। 'हनुमान अंश' की सफलता के बाद श्रद्धालुओं के मन में बाबा की जन्मस्थली देखने की लालसा बढ़ी है।

यही वजह है कि अब प्रतिदिन बढ़ी संख्या में श्रद्धालु देश के अलग-अलग हिस्सों से दर्शन के लिए आ रहे हैं। निजी वाहनों से यहां तक पहुंचने के लिए वे गूगल मैप का सहारा ले रहे हैं। महांत पंडित अवधेश शर्मा के अनुसार पहले प्रतिदिन औसतन 50 से 100 श्रद्धालु आते थे। अब इनकी संख्या में 1500 से अधिक तक पहुंच गई है।

सोमवार को जयपुर से आए चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि उन्हें फिल्म देखने के बाद पता चला कि बाबा का जन्म यहां हुआ था। इससे पहले कैंची धाम का नाम ही सुन रखा था। यहां आकर बहुत अच्छा लगा।

बाबा को दो बार लगता है चाय का भोग

बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली पर मंदिर के अलावा उनका पैतृक आवास और डाक बंगलिया है। कई वर्षों तक निर्विरोध ग्राम प्रधान रहे बाबा इसी डाक बंगलिया में बैठकर पंचायत करते थे। दोनों स्थानों को सहेजा गया है। खास बात ये है कि बाबा को प्रतिदिन सुबह सात बजे और दोपहर तीन बजे चाय का भोग लगता है। जिसे चाय प्रसादी कहते हैं।

इस तरह पहुंच सकते हैं अकबरपुर

आगरा या कानपुर की ओर से सड़क मार्ग से आने वाले श्रद्धालु हाईवे होते हुए टूंडला की राजा का ताल पुलिस चौकी पहुंचें। अकबरपुर जाने वाला मार्ग सर्विस रोड से जुड़ा है। इसकी जानकारी देने के लिए जगह-जगह सूचना पट्ट लगे हैं। अपने वाहन से मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। वहीं, ट्रेन मार्ग से टूंडला जंक्शन या फिरोजाबाद रेलवे स्टेशन से प्राइवेट वाहनों से पहुंचा जा सकता है।

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