'जैसे मेरे बेटे को तड़पा-तड़पाकर मारा, ऐसे ही मरेगा हत्यारा' फिरोजाबाद आरव हत्याकांड में मां बोली- न्याय की जीत हुई
आरव हत्याकांड में दोषी विराज को फांसी की सजा सुनाए जाने से मां और ननिहाल पक्ष के लोग खुश हैं, जिन्होंने इसे न्याय की जीत बताया। गांव वालों ने भी न्याय ...और पढ़ें

आरव की मां। मृतक बच्चे का फाइल फोटो।
HighLights
आरव हत्याकांड में दोषी विराज को फांसी की सजा सुनाई गई
मां और ननिहाल पक्ष ने फैसले को न्याय की जीत बताया
ग्रामीणों ने न्यायालय के निर्णय से कानून में विश्वास जताया
संवाद सहयोगी, सिरसागंज (फिरोजाबाद)। आरव हत्याकांड में दोषी को सजा सुनाए जाने से मां और ननिहाल पक्ष के लोग खुश हैं। उन्होंने कहा कि न्याय की जीत हुई है। दोषी को उसके किए की सजा मिली है। वहीं गांव के लोगों ने कहा कि न्यायालय ने निर्णय से लोगों का कानून में विश्वास बढ़ा है।
जैसे ही फांसी की सजा सुनाए जाने की बात रति को पता चली। उनकी आंखों से आंसू निकल आए। वह सिसकते हुए बोलीं कि जैसे मेरे में बेटे को तड़पा-तड़पाकर मारा था। अब वह भी ऐसे ही मरेगा।
आरव के ननिहाल पक्ष के लोग दोषी को मृत्युदंड दिए जाने से खुश
आरव की मां रति तबीयत खराब होने की वजह से सजा सुनाए के दौरान अरांव में ग्राम बामई अपने घर ही थीं। फोन पर पौने तीन बजे जब मां ने दोषी विराज को फांसी की सजा सुनाए जाने की जानकारी दी तो वह रो पड़ी। सिसकते हुए कहा कि बेटे की मृत्यु के बाद मन में यही एक इच्छा थी, जो न्यायालय ने आज पूरी कर दी। अब बस उसे फांसी की सजा हो जाए तो पूरी संतुष्टि मिल जाएगी।
दोषी के निर्णय के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील की बात पर कहा कि न्यायालय पर पूरा भरोसा है। हाईकोर्ट से भी न्याय मिलेगा। गांव के लोगों ने भी न्यायालय के फैसले की सराहना की।

सजा सुनाए जाने के बाद शुक्रवार को आरव हत्याकांड में दोषी जितेंद्र पाठक उर्फ विराज (बाएं से दूसरे) को न्यायालय से बाहर लाते पुलिसकर्मी : जागरण
नानी बोलीं विराज को भी मरता हुआ देखूंगी
फैसला आने के बाद आरव की नानी पिंकी शर्मा ने कहा कि विराज ने उनका विश्वास तोड़ा। उसे फांसी ही होनी चाहिए थी। यदि वो इससे बचने के लिए हाई कोर्ट जाएगा, तो वहां भी मजबूती से पैरवी की जाएगी। यह कहते कहते वह भावुक हो गईं। बोलीं इस सजा दिलाकर ही रहेंगे। मेरा बच्चा गया है। कोई बकरी का बच्चा नहीं था। जैसे मेरा बच्चा गया। वैसे ही इसको भी मरता हुआ देखूंगी।
फांसी की सजा न्यायालय के उन फैसलों में से एक है। जिससे लोगों का न्याय प्रणाली में भरोसा मजबूत हुआ है। समाज में ऐसे दंरिदे के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
संतोष ग्रामीण
इस मामले में पुलिस और न्याय पालिका की जितनी तारीफ की जाए कम है। फैसले से हम बहुत खुश हैं। एक बार फिर साफ हो गया कि यह कानून की जीत है।
राजेश
इस जघन्य हत्याकांड में ऐसे ही निर्णय की उम्मीद की जा रही थी। न्यायालय के फैसले ने कानून के प्रति विश्वास को बढ़ा दिया है। अब फिर कोई ऐसी घटना करने की सोचेगा तक नहीं।
जितेंद्र कुमार
मासूम की कमी हमेशा खलेगी, लेकिन हत्यारे को उसके कर्माें की सजा मिल गई है। निर्णय ने न्यायालय की साख को मजबूत किया है। हमें कोर्ट से ऐसे निर्णय की उम्मीद थी।
बृजेश उपाध्याय।