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    US, Israel Attack Iran: ‘कमरे से 300 मीटर दूर गिरी मिसाइल’: खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की दहला देने वाली आपबीती

    Updated: Sun, 01 Mar 2026 09:13 PM (IST)

    खाड़ी देशों में फंसे भारतीय, विशेषकर दुबई और अजमान में, अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण दहशत में हैं। मिसाइल हमलों और लगातार सायरन की आवाज़ से वे ड ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों ने बताई आपबीती....

    2. दुबई में फंसे भारतीयों ने बताए हालात, सकुशल वापसी की फरियाद

    3. डर, दहशत व अनहोनी की आशंका पर रात भर टहलते रहते प्रवासी

    जागरण संवाददाता, फतेहपुर। ‘अरे दीदी हियां के हालात बहुत खराब हंय, आज रात मा तो जहां रहित हय वा कमरा से 300 मीटर दूर मिसाइल का धमाका भवा। धमाका एतना तगड़ा रहय कि खिड़की-दरवाजा तक हिलय लाग। रात-रात भर जागकर दुबके रहित हय। कब का होइ जाए कुछ नहीं कहा जा सकत हय। बस भारत सरकार हम सबका जल्दी से जल्दी हियां से वापस बुला लेय।’ दुबई के अजनान में रोजी-रोटी के गए गए क्रेन चालक पवन ने अपनी आपबीती बहन से साझा की। अमौली ब्लाक के बसफरा गांव निवासी दयाशंकर कुशवाहा के पुत्र पवन अपने कुछ रिश्तेदारों के रोजी-रोटी के लिए यहां गए हुए हैं।

    अमेरिका, इजरायल से चल रहे ईरान का युद्ध प्रवासियों के लिए घातक हो गया है। ईरान की सैन्य कार्रवाई के बाद दुबई समेत अरब देशों में दहशत का माहौल है। काम के सिलसिले में वहां रह रहे जिले के युवाओं ने शनिवार रात जोरदार धमाकों के बीच दहशत में समय गुजारा। कई प्रवासियों ने रात सड़कों पर टहलकर काटी और स्वजन से वीडियो कॉल पर बात करते हुए भावुक हो गए।

    अमौली ब्लॉक के बसफरा गांव निवासी दयाशंकर कुशवाहा का पुत्र पवन अपने रिश्तेदारों विनय पुत्र रमेश व धनराज पुत्र राजेंद्र निवासी भदबा के साथ 28 अक्टूबर को क्रेन चालक की नौकरी के लिए अजमान (दुबई) गया था। पवन ने बहन छोटी से बातचीत में बताया कि उनके कमरे से करीब 300 मीटर दूरी पर कई बार जोरदार धमाके हुए।

    मिसाइलों के अटैक से कमरा कांप उठा, खिड़कियां हिलने लगीं। जिस इमारत में विस्फोट हुआ वह पलक झपकते ही ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। आसमान चीरती मिसाइलों की गड़गड़ाहट से पूरी रात नींद नहीं आई। बाहर निकलकर सड़क पर घूमते रहे। हर आवाज पर दिल धड़कता रहा। पवन कुशवाहा ने कहा कि मोबाइल पर लगातार घर से बात करते रहे ताकि डर कम हो सके, लेकिन बहन के बगल में मां की रोती आवाज सुनकर खुद को संभालना मुश्किल हो गया।

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    इसी तरह रामखेलावन सोनकर का पुत्र राजू, जो पांच माह पहले जबआली (दुबई) में मिस्त्री का काम करने गया था, मिसाइल हमलों से सहमा हुआ है। उसकी मां मेदिंया के अनुसार राजू ने फोन पर बताया कि हुई चर्चा साझा करते हुए कहा आसमान में तेज रोशनी और धमाकों की आवाज से लोग इधर-उधर बेटा भागता रहा। कंपनी ने काम बंद कर दिया है। बाहर निकलने से मना किया गया है। कमरे में बंद रहकर ही समय काट रहे हैं।

    राजू ने कहा कि थोड़ी-थोड़ी देर में सायरन बजने से दिल बैठ जाता है और मन करता है कि किसी तरह घर लौट आएं। गुलजारी सोनकर का पुत्र शीलू भी दुबई में फंसा है। उसने परिवार से कहा कि यहां माहौल बहुत डरावना है। सोशल मीडिया पर अलग-अलग खबरें देखकर घबराहट और बढ़ जाती है। रात भर जागते रहे, किसी अनहोनी का डर लगा रहा। परिवार के लोग लगातार उससे संपर्क में हैं, लेकिन सुरक्षित लौटने की चिंता सता रही है।

    उधर बुढ़वा गांव निवासी जयपाल यादव का पुत्र जयवीर सऊदी अरब में रोजगार के सिलसिले में गया था। उसने फोन पर स्वजन से कहा कि हालात कब बिगड़ जाएं, कुछ कहा नहीं जा सकता। दिल करता है सब छोड़कर घर आ जाऊं। यहां हर समय तनाव बना रहता है। उसने भारत सरकार से सुरक्षित वापसी की व्यवस्था कराने की गुहार लगाई है।

    असोथर के राजेन्द्र, खागा के निश्छल, पीरनपुर के मशरुद्दीन और देवमई के सचिन पटेल ने भी स्वजन से बात कर अपनी चिंता जाहिर की है। इन प्रवासियों का कहना है कि काम बंद होने से रोजी-रोटी का भी संकट खड़ा हो गया है। सबसे बड़ी चिंता जान की सुरक्षा को लेकर है। सभी ने भारत सरकार से सुरक्षित स्वदेश वापसी की मांग की है।