सावन में 151 किलो गंगाजल वाली कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र, एटा में कांवड़ियों का हुआ स्वागत
सावन मास में कांवड़ यात्रा के दौरान जलेसर से गुजर रहे श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर है। कछला घाट से भरतपुर जा रही 151 किलो गंगाजल वाली एक विशाल कांवड़ ...और पढ़ें

कछला घाट से 151 किलोग्राम की कांवड़ लेकर भरतपुर जाते युवा।
संवाद सहयोगी, जलेसर। सावन मास में भगवान शिव की आराधना के लिए कांवड़ लेकर जाने वाले श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर है। कछला घाट से गंगाजल लेकर बड़ी संख्या में कांवड़िये जलेसर होकर आगरा, भरतपुर, ग्वालियर, धौलपुर, मुरैना और भिंड सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए रवाना हो रहे हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान मार्ग पर श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना हुआ है।
कछला घाट से भरतपुर के लिए छह युवा करीब दो कुंतल वजन की कांवड़ लेकर जा रहे हैं, जिसमें 151 किलो गंगाजल भरा हुआ है और कलश का वजन लगभग 50 किलो है। यह विशाल कांवड़ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कांवड़िये इसे सोमवार को भरतपुर स्थित भगवान शिव के मंदिर में चढ़ाएंगे।
इस बार कांवड़ यात्रा में परंपरागत कांवड़ की संख्या कम दिखाई दे रही है, जबकि श्रद्धालु गंगाजल ले जाने के लिए कलश को प्राथमिकता दे रहे हैं। डाक कांवड़ भी अपेक्षाकृत कम नजर आ रही हैं, फिर भी कांवड़ मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बनी हुई है।
कांवड़ियों की सुविधा के लिए मार्ग में जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए हैं, जहां श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, भोजन, विश्राम सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्थानीय लोग भी इन सेवा शिविरों में बढ़-चढ़कर सहभागिता कर रहे हैं। कांवड़िये हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं।