बचपन के दोस्त बने श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO, देवरिया के गांव में खुशी की लहर
सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले सीईओ बनने से उनके बचपन के दोस्त ...और पढ़ें

मानस भवन में विहिप महासचिव बजरंग लाल बांगड़ा के साथ जाते सीईओ जितेंद्र मिश्र। जागरण।
HighLights
जितेंद्र मिश्र श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले सीईओ।
उनकी कामयाबी से बचपन के दोस्तों का सीना गर्व से चौड़ा।
सफलता ने वर्षों पुरानी दोस्ती की यादों को फिर से जीवंत किया।
मोहित शुक्ला, भाटपाररानी। बचपन की दोस्ती भी अजीब होती है। वक्त के साथ रास्ते अलग हो जाते हैं, मुलाकातें बंद हो जाती हैं, लेकिन यादें मन के किसी कोने में हमेशा जिंदा रहती हैं। भोपतपुरा गांव के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के बचपन के मित्रों के लिए उनकी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में नियुक्ति ऐसी ही पुरानी यादों को फिर से जीवंत करने वाली है।
बचपन में साथ खेलने के बाद बिछड़े दोस्तों की जितेंद्र से दोबारा मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन उनकी उपलब्धि की खबर ने दोस्तों का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। कामयाबी ने वर्षों पुरानी दोस्ती की डोर फिर से खींच दी।
साथ खेले, फिर वक्त ने राहें अलग कर दीं
बचपन के मित्र योगेंद्र मिश्र बताते हैं कि जितेंद्र के साथ गांव में बचपन के दिन गुजरे। सभी मित्र साथ खेलते और घंटों एक-दूसरे के साथ समय बिताते थे। समय बीतता गया और सभी अपने-अपने रास्ते पर आगे बढ़ गए। बचपन में बिछड़ने के बाद जितेंद्र से फिर कभी मुलाकात नहीं हो सकी।
बृज बिहारी मिश्र कहते हैं कि जिंदगी में एक-दूसरे से दूर हो गए, लेकिन बचपन की यादें आज भी मन में ताजा हैं। जब जितेंद्र के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला सीईओ बनने की खबर सुनी तो दिल खुशी से भर गया। संतोष मिश्र बताते हैं कि जितेंद्र एक-दो बार गांव भी आए, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें तब हुई, जब वह गांव से निकल चुके थे। मन में उनसे मिलने की इच्छा थी, लेकिन संयोग नहीं बन सका।
रामायण कुशवाहा भी बचपन के दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि जितेंद्र के साथ बिताए दिन आज भी याद हैं। समय ने सभी को अलग कर दिया और फिर मुलाकात नहीं हुई। लेकिन उनकी सफलता की खबर ने पुरानी दोस्ती की यादों को फिर जीवंत कर दिया। मुलाकात भले नहीं हुई, लेकिन उनकी सफलता की खबर सुनकर ऐसा लगा जैसे अपना कोई बहुत करीबी आगे बढ़ गया हो।
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गांव की गलियों से अयोध्या तक का सफर
मित्रों के लिए जितेंद्र की उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि उनकी शुरुआती यादें इसी गांव से जुड़ी हैं। जिन गलियों में उन्होंने बचपन में दोस्तों के साथ खेलते हुए वक्त बिताया, उन्हीं यादों से निकलकर उन्होंने देशसेवा में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया। अब अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने पर भोपतपुरा के लोगों में भी गर्व का भाव है।
पुराने दोस्तों के पास जितेंद्र के साथ बिताए बचपन की यादें हैं और उनसे दोबारा मिलने की कसक भी। वर्षों से मुलाकात नहीं हुई, लेकिन सफलता की खबर ने दूरी को जैसे एक पल के लिए मिटा दिया। दोस्तों का कहना है कि बचपन का साथी आज जिस मुकाम पर पहुंचा है, उस पर केवल वे ही नहीं, बल्कि पूरा गांव गर्व महसूस कर रहा है।
