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पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर को कोर्ट से नहीं मिली राहत, 21 जनवरी तक बढ़ी कस्‍टडी

Updated: Wed, 07 Jan 2026 08:00 PM (IST)

पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को देवरिया कोर्ट से राहत नहीं मिली है। औद्योगिक प्लाट आवंटन मामले में उनकी न्यायिक हिरासत 21 जनवरी तक बढ़ा दी गई है। मुख्य न ...और पढ़ें

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विधि संवाददाता, देवरिया। औद्योगिक प्लाट आवंटन के मामले में 10 दिसंबर से जेल में निरुद्ध अमिताभ ठाकुर को बुधवार को भी अदालत से कोई राहत नहीं मिली। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजू कुमारी की अदालत ने आरोपित पूर्व आईपीएस के तरफ से प्रस्तुत की गई दलील सिरे से खारिज करते हुए न्यायिक रिमांड की धाराओं में 21 जनवरी तक जिला कारागार में निरुद्ध रखने का आदेश दिया। इसके पूर्व मंगलवार को उनका जमानत प्रार्थना पत्र भी खारिज हो गया था। अब उन्हें जनपद न्यायाधीश के यहां नियमित जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करना होगा।

वर्ष 1999 में पुलिस अधीक्षक के पद पर रहते हुए अमिताभ ठाकुर ने धोखाधड़ी व आपराधिक खड्यंत्र करके अपनी पत्नी के नाम औद्योगिक प्लाट आवंटित करा लिया था ।जिसके विरुद्ध 25 जुलाई 2025 को ताल कटोरा लखनऊ के रहने वाले संजय शर्मा ने सदर कोतवाली में मुकदमा अंतर्गत धारा 419 420 467 468 471 120 बी आईपीसी दर्ज कराया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने विवेचना एसआईटी को अंतरित कर दी। एसआइटी के विवेचक सोबरन सिंह ने 10 दिसंबर 2025 को आरोपित अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार करके मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। सुनवाई के उपरांत सीजेएम ने न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार देवरिया भेज दिया गया।

ex IPS amitabh thakur

आरोपित के अधिवक्ता ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में रिमांड के विरुद्ध प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते हुए यह मांग की की जिन दफाओं में विवेचक ने आरोपित को गिरफ्तार किया है उसका कोई ठोस साक्ष्य विवेचक के पास मौजूद नहीं है। ऐसी स्थिति में आवेदक के विरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता है, इसलिए रिमांड निरस्त करते हुए आरोपित को रिहा किया जाए। मंगलवार को अभियोजन व बचाव पक्ष की तरफ से तीन घंटे चली बहस के बाद सीजेएम ने आदेश सुरक्षित कर लिया था।

अदालत ने पाया कि आरोपित को जिस साक्ष्य के आधार पर पूर्व में रिमांड दिया गया था वह साक्ष्य अभी भी केस डायरी में मौजूद है। ऐसे में बचाव पक्ष की का प्रार्थना पत्र निरस्त करते हुए उन्हें 21 जनवरी तक न्यायिक अभिरक्षा में रखने का आदेश दिया जाता है।

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