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मैहर जा रहे श्रद्धालुओं को पिकअप ने मारी टक्कर, पहिया के नीचे आने से एक की मौत; दो घायल

Published: Thu, 08 Oct 2026 03:40 PM (IST)

मैहर देवी दर्शन को पैदल जा रहे चित्रकूट के तीन श्रद्धालुओं को तेज रफ्तार पिकअप ने टक्कर मार दी, जिसमें ...और पढ़ें

सड़क हादसे में युवक की मौत।

सड़क हादसे में युवक की मौत।

HighLights

  1. मैहर देवी दर्शन को जा रहे तीन श्रद्धालु हादसे का शिकार।

  2. तेज रफ्तार पिकअप की टक्कर से ललित यादव की मौके पर मौत।

  3. दो अन्य श्रद्धालु महेश और धनपत गंभीर रूप से घायल हुए।

जागरण संवाददाता, चित्रकूट। मैहर देवी दर्शन के लिए पैदल जा रहे तीन श्रद्धालुओं को गुरुवार तड़के करीब पांच बजे तेज रफ्तार पिकअप ने टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही महेश और धनपत उछलकर सड़क से दूर जा गिरे, जबकि ललित यादव का बैग पिकअप के अगले हिस्से में फंस गया।

वह वाहन के साथ घिसटता हुआ पहिये के नीचे आ गया। उसके ऊपर से पहिया निकलने मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक पिकअप लेकर सतना की ओर भाग निकला। दोनों घायलों को मझगवां अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना मध्यप्रदेश जिला सतना थाना मझगवां के मिचकुरिन घाटी की है।

नारायणपुर गांव निवासी श्याम यादव ने बताया कि गांव के युवक हर साल नवरात्र में पैदल मैहर देवी दर्शन के लिए जाते हैं। इस बार भी 20 वर्षीय ललित यादव, 21 वर्षीय महेश, 19 वर्षीय धनपत, 20 वर्षीय धनराज, 25 वर्षीय रामबाबू, पिंटू और अंकुल बुधवार सुबह करीब सात बजे गांव से पैदल निकले थे।

सभी गुप्त गोदावरी होते हुए मैहर जा रहे थे। बुधवार को पिंडरा में रुकने के बाद गुरुवार तड़के उन्होंने आगे की यात्रा शुरू की। बताया कि ललित, महेश और धनपत अन्य साथियों से करीब 50 मीटर आगे चल रहे थे। मिचकुरिन घाटी के पास चित्रकूट की ओर से सतना जा रही तेज रफ्तार पिकअप ने तीनों को टक्कर मार दी। महेश और धनपत टक्कर लगने से छिटककर दूर जा गिरे।

वहीं ललित का बैग वाहन के अगले हिस्से में फंस गया। इससे वह संभल नहीं सका और पिकअप के पहिये के नीचे आ गया। वाहन का पहिया उसके ऊपर से निकलने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। लोगों ने पिकअप को रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक वाहन लेकर भाग निकला।

साथियों ने घायलों को मझगवां अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने ललित को मृत घोषित कर दिया। महेश और धनपत का उपचार चल रहा है।ललित इंटर का छात्र था और दो बहनों के बीच परिवार का इकलौता बेटा था। पिता राजकरन दुकान पर नौकरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

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