टीकाकरण के बाद भी मिल रहे एमआर रोगी, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग सकते में
बुलंदशहर में मीजल्स रुबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान के बावजूद 40 मरीज सामने आए हैं, जिससे चिकित्सा क्षेत्र में चिंता है। चिकित्सकों के अनुसार, टीके की दो ...और पढ़ें

(प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
बुलंदशहर में टीकाकरण के बावजूद 40 एमआर रोगी मिले।
टीके की दोनों खुराक न लेना मुख्य कारण बताया गया।
स्वास्थ्य अधिकारी चिंतित, आगामी अभियान की तैयारी में।
जागरण संवाददाता, बुलंदशहर। मीजल्स रुबेला की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण अभियान भी चलाया, बावजूद इसके एमआर (मीजल्स रुबेला) के मरीज सामने आ रहे हैं। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक एक जनवरी से 30 जून तक छह माह में एमआर के 40 मरीज सामने आए हैं। छह सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। टीकाकरण के बाद भी एमआर के केस सामने आने से स्वास्थ्य अधिकारी चिंतित हैं।
बच्चों और किशोरों को खसरा और रूबेला (एमआर) से बचाने के लिए हर साल टीकाकरण कराया है। बावजूद इसके हर साल एमआर के तमाम मरीज सामने आते हैं। इस साल मिले 40 मरीजों में चार माह से 22 साल तक की आयु के युवा शामिल हैं। टीका लगने के बाद भी मीजल्स रुबेला के मरीज निकलने के कई कारण हैं। चिकित्सकों का कहना है कि टीके की दोनों खुराक न लेने, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कम होने या वायरस का बहुत ज्यादा फैलने के कारण लोग बीमारी की चपेट में आते हैं।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. शशिकांत राय का कहना है कि टीका लगने से बीमारी का असर गंभीर नहीं होता है। उन्होंने बताया कि कई लोग बच्चों को केवल पहली खुराक पिलाकर भूल जाते हैं, जबकि पूरी सुरक्षा के लिए दोनों खुराक जरूरी हैं। कुछ बच्चों का शरीर टीके के बाद भी पर्याप्त एंटीबाडी नहीं बना पाता। जिन बच्चों को टीका लगा होता है, उनमें बीमारी होने पर भी खतरा कम रहता है।
पिछले एमआर टीकाकरण अभियान में जिले के 2581 स्कूलों के एक लाख 34 हजार 369 बच्चों को टीका लगाया गया था। पिछले डिप्थीरिया अभियान में 2545 स्कूलों के 56 हजार 916 बच्चों को टीडी और डीपीटी की वैक्सीन दी गई। अब जिलें में तीन अगस्त से डिप्थीरिया अभियान चल रहा है। इसके तहत 47 हजार 866 बच्चों वैक्सीन दी जानी है। इसके साथ ही आगामी अभियान में लगभग 48 हजार 877 बच्चों को एमआर वैक्सीन दी जाएगी।