बकरीद पर बकरे और भैंस की कुर्बानी में होता है बड़ा अंतर, बुलंदशहर में बकरा बाजार रहा गुलजार
बुलंदशहर में ईद-उल-अजहा (बकरीद) से पहले बकरा बाजार गुलजार रहा, जहां गैर जिलों और राज्यों से लाए गए कुर्बानी के पशुओं की भारी खरीद-फरोख्त हुई। ...और पढ़ें


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जागरण संवाददाता, बुलंदशहर। ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार हर्षोल्लास से मनाने के लिए मंगलवार को दिनभर बाजारों में चहल-पहल रही। जरूरत का सामान खरीदने के लिए दुकानों पर भी भीड़ लगी रही।
वहीं, बकरा बाजार भी गुलजार रहा। गैर जिले एवं प्रदेशों से लाए बकरों की दिनभर खरीद-फरोख्त होती रही। पशु पैंठ में 50 हजार से दो लाख रुपये से अधिक कीमत में बकरे बेचे गए।
इस्लाम धर्म में ईद-उल-अजहा (बकरीद) त्योहार बेहद खास माना जाता है। इस दिन कुर्बानी का विशेष महत्व होता है। कुर्बानी के लिए जहां बड़े जानवर (भैंस) पर सात हिस्से होते हैं। वहीं, बकरे जैसे छोटे जानवरों पर महज एक हिस्सा होता है।
इसका मतलब यह है कि यदि कोई शख्स भैंस की कुर्बानी कराता है तो उसमें सात लोगों को शामिल किया जा सकता है। वहीं, बकरे की कुर्बानी कराता है तो वो सिर्फ एक शख्स के नाम पर होती है।
बकरीद पर कुर्बानी के चलते बकरों एवं बड़े जानवरों की डिमांड बढ़ जाती है। इसलिए पशु व्यवसायी पहले से ही कुर्बानी की तैयारी में जुट जाते हैं।
प्रदेश के अन्य जिलों के अलावा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान आदि राज्यों से कुर्बानी के लिए पशुओं को लेकर आते हैं। इस बार भी व्यापारी इन प्रदेशों से कुर्बानी के पशुओं को लेकर आए। जिनकी पशु पैंठ से लेकर गली-मुहल्लों में खूब ब्रिकी हुई।
कुर्बानी के पशुओं के दामों में रहा भारी उछाल
बकरीद से पहले मंगलवार को दिनभर कुर्बानी के पशुओं की लोगों ने खरीदारी की। इससे कुर्बानी के पशुओं के दामों में भारी उछाल भी देखा गया।
व्यवसायी फरमान ने बताया कि इस बार कुर्बानी के पशुओं को विभिन्न प्रदेशों से लाया गया है। पशु पैंठ में वजन के हिसाब से बकरों को काफी महंगे दामों पर बेचा गया। 50 हजार रुपये से अधिक कीमत तक में बकरा बेचा गया। इसी प्रकार कुर्बानी के अन्य बड़े पशुओं की ब्रिकी की हुई है।
बाजारों में भी दुकानों पर हुई खरीदारी
जिलेभर के बाजार में खरीदारी को लगी रही भीड़ ईद-उल-अजहा (बकरीद) के लिए बाजारों में जमकर खरीदारी भी हुई। महिलाएं सौंदर्य प्रसाधन के साथ चूड़ी, कंगन आदि की खरीदारी दुकानों पर करतीं नजर आई।
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रेडीमेड कपड़ों की दुकानों पर भी महिला, पुरुष और युवाओं की भीड़ लगी रही। जूते, इत्र, टोपी आदि भी खरीदे गए। मेवे, सेमई, फैनी आदि को खरीदने के लिए जिलेभर के बाजार गुलजार रहे।