बिना उद्घाटन 6 साल से पुल पर UP व उत्तराखंड के बीच दौड़ रहे वाहन, परतें उखड़ने पर सरिये दिखे तो उठा गुणवत्ता पर सवाल
Bijnor News: बालावाली पुल रुड़की और सहारनपुर को बिजनौर से जोड़ता है, छह साल से बिना उद्घाटन के चालू है और अब उसकी सतह उखड़ने लगी है, जिससे गुणवत्ता पर ...और पढ़ें

बालावाली पुल पर दिखते सरिये। जागरण
HighLights
700 मीटर संपर्क मार्ग बना मुसीबत का सबब।
अधूरा और गड्ढों भरा संपर्क मार्ग बना परेशानी।
संवाद सूत्र,नागल सोती (बिजनौर)। रुड़की व सहारनपुर को बिजनौर से जोड़ने और दोनों क्षेत्रों के बीच की दूरी कम करने के उद्देश्य से करीब एक दशक पहले शुरू हुआ बालावाली पुल आज भी अपनी पूरी तस्वीर के लिए तरस रहा है। वर्ष 2020-21 में निर्माण पूरा होने के बाद से पुल पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच यातायात तो लगातार जारी है, लेकिन करीब छह वर्ष बाद भी इसका विधिवत उद्घाटन नहीं हो सका।
दूसरी ओर पुल को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग भी अधूरा और बदहाल है। अब पुल की सतह की कई जगहों पर परतें उखड़ने लगी हैं और कंक्रीट हटने से सरिये दिखाई देने लगे हैं। इससे निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कांच फैक्ट्री से बाबा भारती आश्रम तक करीब 700 मीटर का संपर्क मार्ग वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे और उबड़-खाबड़ रास्ता होने के कारण वाहन हिचकोले खाते हुए निकलते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग रुड़की और सहारनपुर की ओर जाने वाले लोगों के लिए दूरी कम करता है, इसलिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन इसका इस्तेमाल करते हैं।
बरसात में समस्या और गंभीर हो जाती है। गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता और दोपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ अन्य वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। वर्षों से पुल पर वाहनों की आवाजाही हो रही है।
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स्थानीय लोगों के अनुसार प्रतिदिन हजारों वाहन इस पुल से गुजरते हैं। इसके बावजूद पुल का विधिवत उद्घाटन नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पुल का निर्माण पूरा हो चुका है और उस पर नियमित यातायात चल रहा है, तो औपचारिक उद्घाटन अब तक क्यों नहीं किया गया।
परतें उखड़ीं, दिखने लगे सरिये
पुल की सतह की कई जगहों पर कंक्रीट की परत उखड़ने लगी हैे। कुछ स्थानों पर कंक्रीट हटने के बाद लिंटर के सरिये भी दिखाई देने लगे हैं। निर्माण पूरा होने के कुछ ही वर्षों बाद इस तरह की स्थिति सामने आने से पुल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक व अभिषेक, रितिक, पीतम सिंह, मोहित ने पुल की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि हजारों लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए बनाए गए पुल में यदि इतनी जल्दी निर्माण सामग्री की परतें उखड़ रही हैं तो इसकी निष्पक्ष तकनीकी जांच जरूरी है। उन्होंने पुल में इस्तेमाल कंक्रीट, सरिये और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता के साथ निर्माण मानकों की जांच विशेषज्ञ टीम से कराने की मांग की है।
बालावाली पुल को मंजूरी देने के पीछे शासन की मंशा रुड़की-सहारनपुर और बिजनौर क्षेत्र के बीच आवागमन सुगम करने तथा दूरी कम करने की थी। लेकिन पुल के साथ जुड़ा संपर्क मार्ग आज भी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। ऐसे में करोड़ों रुपये की परियोजना का उद्देश्य कितना पूरा हुआ, यह सवाल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक ने मांग की है कि पुल और संपर्क मार्ग की संयुक्त तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण में खर्च हुई धनराशि, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट और संपर्क मार्ग की वर्तमान स्थिति को सार्वजनिक किया जाए।