बिजनौर में गुलदारों को गांव में आने से रोकेंगे सायरन, ग्राम पंचायतों ने दिए डिवाइस के ऑर्डर
गुलदारों को गांवों में आने से रोकने के लिए बिजनौर की 30 ग्राम पंचायतें वाइल्डलाइफ रिपेलेंट डिवाइस लगाएंगी। ये डिवाइस मोशन सेंसर, सायरन और लेजर लाइट से ...और पढ़ें

HighLights
बिजनौर की 30 ग्राम पंचायतें लगाएंगी वाइल्डलाइफ रिपेलेंट डिवाइस।
डिवाइस में मोशन सेंसर, सायरन और लेजर लाइट होती है।
यह तकनीक गुलदारों को गांवों में आने से रोकेगी।
अजीत चौधरी, बिजनौर। गुलदार को बार बार गांवों में आने से रोकने के लिए अब तकनीक का प्रयोग होने लगा है। ग्राम पंचायत अपने इलाकों में वाइल्डलाइफ रिपेलेंट डिवाइस लगवा रही हैं। इनसे रात को लेजर लाइट निकलती है और बाघ, गुलदार, हाथी को देखकर इनसे आवाज आती है।
30 ग्राम पंचायतों ने डिवाइस के लिए कार्य योजना में प्रस्ताव दिए हैं। जल्दी ही ये डिवाइस इन ग्राम पंचायतों में लग जाएंगी। इससे पहले ये डिवाइस कोटद्वार में लग चुकी हैं।
गन्ने के खेत अब गुलदारों का घर हैं। जिले में गुलदार गांव गांव घूम रहे हैं। गुलदार साढ़े तीन वर्ष में 37 लोगों की जान ले चुके हैं। गुलदारों को पकड़ने के लिए इस समय भी लगभग 125 पिंजरे लगाए गए हैं। गुलदार धीरे-धीरे अपना स्वभाव भी बदल रहे हैं।
साढ़े तीन वर्ष पहले गुलदारों के हमले अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के आसपास के इलाकों में एकदम से बढ़े थे। गुलदार को पकड़ने के लिए कई उपायों पर भी काम किया गया। वाइल्डलाइफ रिपेलेंट डिवाइस भी इनमें से एक है।
नजीबाबाद के ही रहने वाले इंजीनियर रोबिन नील ने अपने साथी साकिब के साथ मिलकर वाइल्डलाइफ रिपेलेंट डिवाइस तैयार की है। इसमें सेंसर मोशन लगे होते हैं। रात में कोई भी मूवमेंट होने पर इसमें से सायरन की तेज आवाज आएगी जो वन्यजीवों को गांवों से दूर रखेगी। वन विभाग भी इस डिवाइस की मदद लेता रहा है। हालांकि बजट के अभाव में ये डिवाइस वन विभाग अभी खरीद नहीं पाया है।
ऐसे करेगा काम
वाइल्डलाइफ रिपेलेंट डिवाइस में मोशन सेंसर होता है। ये अपने आसपास 20 मीटर के दायरे में होने वाली होने वाली हर हलचल पर सायरन बजाता है। इससे लगातार लेजर लाइट निकलती रहती हैं जो बार बार बार जलती बुझती है।
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इसके बाक्स में दो दिशाओं से ये लाइट निकलती हैं। यह सोलर से चलता है। इसकी ऊंचाई चार फीट तक रहती है। इसकी लाइट गुलदार की आंखों पर पड़ती है तो वह उस ओर नहीं आता है। इसकी कीमत दस हजार रुपये है।
वन विभाग भी करता है प्रयोग
बीते वर्ष अमानगढ़ के पास एक बाघिन खेतों में आ गई थी। तब बाघिन को आबादी से दूर रखने के लिए वन विभाग ने नौ डिवाइस खेतों में लगाईं थी। इससे बाघिन आबादी तक नहीं पहुंची।
वर्ष 2023 में गांव खिरनी के पास खेतों में बने एक खंडहर में एक गुलदार काफी समय से रह रहा था। वहां यह डिवाइस लगाई गई। गुलदार की गतिविधि को देखने के लिए ट्रैप कैमरे भी लगाए गए। डिवाइस लगने के बाद गुलदार एक दिन तो आया लेकिन बाद में उसने उस जगह को छोड़ दिया।
एक ही रास्ते से बाहर आते हैं वन्यजीव
अक्सर वन्यजीव वन से बाहर एक ही रास्ते या पगडंडी से आते हैं। यह उनकी आदत होती है। ऐसे ही दस स्थानों पर ये डिवाइस लगाई जाएंगी। इसके अलावा इनके रिजल्ट को देखने के लिए इन स्थानों पर विभाग द्वारा कैमरे भी लगाए जाएंगे। ये डिवाइस सोलर सिस्टम से अपने आप चार्ज होते रहेंगे।
गुलदारों को रोकने के लिए वाइल्डलाइफ रिपेलेंट डिवाइस बहुत काम की साबित होती है। वन विभाग भी ये डिवाइस लगवाने के लिए ग्राम पंचायतों से कह रहा है। इस तरह के उपकरण खरीदने के लिए शासन से भी बजट की मांग की गई है।
-जय सिंह कुशवाहा, डीएफओ