पिंजरे की लोकेशन बदलते ही कैद हो गई पांच वर्षीय मादा गुलदार, ग्रामीणों में बना था दहशत का माहौल
बिजनौर के किरतपुर गांव में दहशत फैला रही पांच वर्षीय मादा गुलदार पिंजरे की लोकेशन बदलने के बाद कैद हो गई, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। ...और पढ़ें

बिजनौर के गांव किरतपुर में पिंजरे में कैद मादा गुलदार। जागरण
HighLights
पांच वर्षीय मादा गुलदार बिजनौर के किरतपुर गांव में पकड़ी गई।
ग्रामीणों ने शावकों की आशंका पर दोबारा पिंजरा लगाने की मांग।
संवाद सूत्र, रेहड़ (बिजनौर)। क्षेत्र के गांव किरतपुर में बकरे और पालतू कुत्ते को अपना शिकार बनाने वाली पांच वर्षीय मादा गुलदार रविवार तड़के वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गई। गुलदार पकड़े जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। वनकर्मी मादा गुलदार को अमानगढ़ टाइगर रिजर्व वन रेंज के गेस्ट हाउस ले गए। वहीं, पीड़ित ग्रामीण ने क्षेत्र में शावकों की मौजूदगी की आशंका जताते हुए दोबारा पिंजरा लगाने की मांग की है।
गांव निवासी सरदार कुलदीप सिंह पुत्र कश्मीर सिंह के अनुसार, मंगलवार दोपहर मादा गुलदार उनके घर में घुस आई थी और उनका बकरा उठा ले गई थी। उसी रात गुलदार ने उनके पालतू कुत्ते को भी अपना शिकार बना लिया था। उनके घर की चारदीवारी न होने के कारण गुलदार लगातार घर के आसपास मंडरा रहा था। इससे परिवार के साथ ही ग्रामीणों में भी भय का माहौल बना था। गुरुवार रात भी गुलदार ने उनके घर में प्रवेश कर लिया था।
परिवार के लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए बुलेट बाइक के साइलेंसर से पटाखे जैसी तेज आवाज निकालकर गुलदार को वहां से भगाया था। इसके बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की थी। सरदार कुलदीप सिंह का आरोप था कि वन विभाग ने उनके घर के पास पिंजरा लगाने के बजाए करीब 500 मीटर दूर गन्ने के खेत में पिंजरा लगाया था। उनका कहना था कि गुलदार लगातार घर के आसपास आ रहा था, लेकिन पिंजरा दूर होने के कारण उसमें कैद नहीं हो पा रहा था।
शनिवार को अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के वनकर्मियों ने पिंजरे की लोकेशन बदलकर उसे दूसरे स्थान पर लगाया। इसके बाद रविवार तड़के मादा गुलदार पिंजरे में कैद हो गई। सूचना मिलने पर वनकर्मी मौके पर पहुंचे और गुलदार को सुरक्षित रूप से अमानगढ़ टाइगर रिजर्व वन रेंज के गेस्ट हाउस ले गए। पीड़ित ग्रामीण सरदार कुलदीप सिंह ने बताया कि गुलदार के साथ शावक भी देखे गए थे। उन्होंने वन विभाग से दोबारा पिंजरा लगाने की मांग की है, ताकि यदि शावक आसपास मौजूद हों तो उन्हें भी सुरक्षित पकड़ा जा सके और ग्रामीणों को गुलदार के खतरे से निजात मिल सके।