बिजनौर में इस साल पकड़े गए 48 गुलदार, DFO बोले- खेतों में अकेले न जाएं लोग; बच्चों व बुजुर्गों को भी न भेंजे
बिजनौर में इस साल साढ़े सात महीने में 48 गुलदार पकड़े गए हैं, जबकि 2019 से अब तक 37 लोगों की जान जा चुकी है। वन विभाग ने ग्रामीणों को खेतों में अकेले ...और पढ़ें

बिजनौर में वन विभाग के पिंजरे में फंसा गुलदार। सौ. वन विभाग।
HighLights
चार गुलदारों को भेजा गया कानपुर और इटावा।
2019 से अब तक 37 लोगों की हुई मौत।
जागरण संवाददाता, बिजनौर। खेतों में गुलदार लगातार दिख रहे हैं। वे मनुष्यों पर हमले कर रहे हैं और गांवों में आकर मवेशियों को मार भी रहे हैं। वन विभाग के पिंजरों में गुलदार लगातार पकड़े भी जा रहे हैं। वन विभाग खेतों में पिंजरे लगाकर गुलदारों को लगातार पकड़ भी रहा है।
इस साल के केवल साढ़़े सात महीनों में ही 48 गुलदार (Leopard) पकड़े जा चुके हैं। वन विभाग के ये आंकड़े राहत पहुंचाने वाले होने के साथ ही सतर्क करने वाले भी हैं। अगर खेतों में 48 गुलदार केवल साढ़े सात महीनों में पकड़े जा चुके हैं तो फिर उनकी संख्या के बारे में अनुमान ही लगाया जा सकता है।
खेतों से आकर गुलदार ने वर्ष 2019 में मनुष्यों पर हमले किए थे। गुलदार ने छह लोगों की जान ली लेकिन गांव वालों ने नजीबाबाद क्षेत्र में गुलदार को घेरकर मार डाला।
इसके बाद सब कुछ शांत रहा और ये शांति वर्ष 2023 तक ऐसे ही बनी रही। लेकिन इसके बाद गुलदारों के हमले लगातार बढ़ते चले गए। खेतों में गुलदार भी पकड़े जाने लगे। अब हाल ये है कि साढ़े सात वर्ष में गुलदार हमले करके 37 मनुष्यों की जान जा चुकी है।
खेतों में साढ़े तीन वर्षाें में लगभग 155 गुलदार पकड़े जा चुके हैं। केवल इस वर्ष में साढ़े सात महीनों से भी कम समय में 48 गुलदार पकड़े गए हैं। अभी भी गुलदारोंं को पकड़ने के लिए वन विभाग ने खेतों में 125 पिंजरे लगा रखे हैं।
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उत्तर प्रदेश में आज किसी किसी जिले में ऐसा नहीं हुआ है कि एक साल में भी इतने गुलदार पकड़े गए हों। वन विभाग गुलदार पकड़ने के मामले में जल्दी ही अर्द्धशतक पूरा करने वाला है। वन विभाग ने पिछले चार तीन दिन में चार गुलदार पकड़े हैं। इन्हें कानपुर चिड़ियाघर और लायन सफारी इटावा भेजा गया है।
औसतन हर साढ़े चार दिन में पकड़ा जा रहा गुलदार
जिले में इस वर्ष 222 दिन में 48 गुलदार पकड़े गए हैं। औसत निकाला जाए तो लगभग साढ़े चार दिन में एक गुलदार पकड़ा जा रहा है। हालांकि बरसात के बाद गुलदार के पिंजरों के फंसने के मामलों में कमी भी आ सकती है। गन्ने की फसल काफी बड़ी हो चुकी है और इस महीने के अंत तक बरसात भी हल्की हो जाएगी। इसके बाद गुलदार फिर से खेतों में गुम हो जाएंगे।
इन्होंने कहा
गुलदारों को पकड़ने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। गुलदार तो पकड़े जा रही रहे हैं लेकिन ग्रामीणों का सतर्क रहना भी बहुत जरूरी है। ग्रामीण खेतों में अकेले न जाएं। बच्चों व बूढ़ों को किसी सूरत में खेतों में न भेजें।
-जय सिंह कुशवाहा, डीएफओ