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महिला के गर्भ से निकला 150 ग्राम का ‘स्टोन बेबी’... चिकित्सक बोले-यह बेहद दुर्लभ स्थिति है

By Digital Desk Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Fri, 09 Oct 2026 05:30 AM (IST)

बिजनौर में चिकित्सकों ने एक 36 वर्षीय महिला के गर्भाशय से 150 ग्राम का मृत भ्रूण निकाला, जिसे 'स्टोन बेबी' ...और पढ़ें

महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में महिला का आपरेशन करने वाली टीम। सौजन्य: स्वास्थ्य विभाग।

महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में महिला का आपरेशन करने वाली टीम। सौजन्य: स्वास्थ्य विभाग।

HighLights

  1. बिजनौर में महिला के गर्भाशय से 150 ग्राम का मृत भ्रूण निकाला।

  2. भ्रूण पर कैल्शियम जमने से वह पत्थर जैसा 'स्टोन बेबी' बना।

  3. यह चिकित्सकीय रूप से एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल स्थिति है।

जागरण संवाददाता, बिजनौर। महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में चिकित्सकों ने दुर्लभ और जटिल मामले में 36 वर्षीय महिला के गर्भाशय से करीब 150 ग्राम का मृत भ्रूण निकाला। लंबे समय तक गर्भाशय में रहने के कारण भ्रूण के चारों ओर कैल्शियम की परत जम गई थी, जिससे वह पत्थर जैसा दिखाई देने लगा था। चिकित्सकीय भाषा में इस स्थिति को ‘स्टोन बेबी’ या ‘लिथोपेडियन’ कहा जाता है।

महिला पेट दर्द और रक्तस्राव की शिकायत लेकर मेडिकल कालेज पहुंची थी। चिकित्सकों के अनुसार वह आठवीं बार गर्भवती हुई थी और उसके चार बच्चे हैं। मई 2026 में करीब साढ़े तीन माह की गर्भावस्था के बाद गर्भाशय की सफाई कराई थी। इसके बाद से उसे रुक-रुककर रक्तस्राव हो रहा था। करीब चार माह से समस्या बनी रहने पर स्वजन उसे उपचार के लिए मेडिकल कालेज लेकर पहुंचे।

महिला रोग विशेषज्ञ डा. धारा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड और रक्त की जांच कराई गई। इसमें गर्भाशय में गर्भावस्था से संबंधित अवशेष और मृत भ्रूण पाया गया। भ्रूण काफी समय से गर्भाशय में मौजूद था। शरीर ने उसे नष्ट करने के बजाय उसके चारों ओर कैल्शियम की परत बना दी, जिससे वह धीरे-धीरे पत्थर जैसा हो गया। चिकित्सकों के मुताबिक ‘स्टोन बेबी’ बेहद दुर्लभ स्थिति है। भ्रूण के गर्भ में मृत हो जाने के बाद यदि उसका आकार इतना बड़ा हो कि शरीर उसे स्वयं अवशोषित न कर पाए तो उसके चारों ओर कैल्शियम जम सकता है। इससे भ्रूण पत्थर जैसा हो जाता है। कई बार इस स्थिति का पता वर्षों बाद चलता है।


लंबे समय से रक्तस्राव के कारण महिला को संक्रमण और अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा था। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए मंगलवार को आपरेशन किया गया। आपरेशन के दौरान प्लेसेंटा और गर्भावस्था से संबंधित अवशेष गर्भाशय की दीवार से मजबूती से चिपके मिले। चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार महिला का गर्भाशय निकालकर मृत भ्रूण को बाहर निकाला गया। प्राचार्य डा. ललिता चौधरी ने बताया कि महिला को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। अब उसकी जान को कोई खतरा नहीं है।