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    15 साल बाद अपनों से मिला लखीमपुर खीरी का अमित, चार साल से आश्रम में रह रहा था

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 01:35 AM (IST)

    लखीमपुर खीरी के अमित सिंह 15 साल बाद अपने परिवार से बिछड़ने के बाद प्रेमधाम आश्रम के प्रयासों से आखिरकार मिल गए। चार साल से आश्रम में रह रहे अमित का अ ...और पढ़ें

    15 साल बाद अपनों से मिला लखीमपुर खीरी का अमित।

    15 साल बाद अपनों से मिला लखीमपुर खीरी का अमित।

    HighLights

    1. अमित सिंह 15 साल बाद अपने परिवार से मिले।

    2. प्रेमधाम आश्रम ने चार साल बाद परिवार से मिलाया।

    3. लखीमपुर खीरी निवासी अमित का मिलन भावुक क्षण।

    संवाद सहयोगी, नजीबाबाद। लगभग 15 वर्षों से अपने परिवार से बिछड़े 45 वर्षीय अमित सिंह आखिरकार अपने स्वजन से मिल ही गए। प्रेमधाम आश्रम के प्रयासों से चार वर्षों से यहां रह रहे अमित को सोमवार को उनके परिवार तक पहुंचाया गया। लंबे समय बाद अपनों को सामने पाकर अमित और उनके परिजनों की आंखें नम हो गईं।

    जनपद लखीमपुर खीरी निवासी अमित सिंह पुत्र रमेश सिंह मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण अपने घर और परिवार के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहे थे। ऐसे में उनके स्वजन की तलाश करना प्रेमधाम आश्रम के लिए चुनौतीपूर्ण था।

    प्रेमधाम आश्रम के निदेशक फादर बेनी और स्टाफ ने लगातार प्रयास करते हुए विभिन्न माध्यमों से खोजबीन की। आखिरकार अमित के परिवार का पता लगाने में सफलता मिली।

    फादर ने बताया कि अमित आश्रम में चार साल से रह रहा था। उसे दिल्ली की किसी संस्था ने आश्रम में भिजवाया था, तभी से उसकी देखभाल आश्रम परिवार कर रहा था।

    स्वजन के सामने पहुंचते ही अमित भावुक हो गए। लगभग 15 वर्षों के बिछोह के बाद परिवार से मिलन का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। स्वजन की आंखों से भी खुशी के आंसू छलक पड़े। अमित के बड़े भाई श्याम सिंह अपनी पत्नी रेखा के साथ उसे लेने के लिए आए थे।

    प्रेमधाम के निदेशक फादर बेनी ने कहा कि जरूरतमंदों की सेवा केवल उनकी देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें उनके परिवार और अपनों से मिलाना भी सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अमित को उनके स्वजन से मिलाने में मिली सफलता से प्रेमधाम के स्टाफ में भी खुशी का माहौल है।

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    फादर ने बताया कि अमित को अचानक ही अपने भाई के दोस्त का फाेन नंबर याद आ गया। इस नंबर पर काल की गई तो उसके स्वजन से आसानी से संपर्क हो गया। वर्तमान में आश्रम में लगभग 158 बच्चे ऐसे हैं, जो अपने परिवार से बिछड़कर आश्रम में रह रहे हैं। उन्हें भी विभिन्न माध्यमों से अपने तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।