बस्ती में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से तटबंधों पर बढ़ा दबाव, कई क्षेत्रों में कटान का खतरा बरकरार
बस्ती में सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 23 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है, जिससे तटबंधों पर दबाव ...और पढ़ें

सरयू का जलस्तर बढ़ने से तटबंधों पर बढ़ा दबाव।
HighLights
सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर।
तटबंधों पर दबाव बढ़ा, कई गांवों में कटान।
फसलें बर्बाद, पशुओं के चारे का संकट।
जागरण टीम बस्ती। सरयू का जलस्तर बढ़ने से अब तटवर्ती गांवों के समस्या बढ़ गयी है। नदी खतरे के निशान से 23 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है जो उपजाऊ भूमि को तो काट ही रही है। तटबंधों पर भी दबाव बढ़ने लगा है। जलभराव से कई गांवों के रास्ते पानी में डूब गए हैं।
ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। धान और सब्जियों की फसल बर्बाद होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, वहीं पशुपालकों के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है।
शनिवार शाम चार बजे केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या के अनुसार सरयू का जलस्तर खतरे के निशान 92.730 मीटर से 23 सेंटीमीटर ऊपर 92.960 मीटर दर्ज किया गया। हालांकि, जलस्तर स्थिर बताया गया है। अपस्ट्रीम के सभी स्टेशनों पर भी नदी का जलस्तर स्थिर है।
जानकारों के अनुसार अगले एक-दो दिनों में जलस्तर में कमी आने की संभावना है।जलस्तर बढ़ने से विक्रमजोत और दुबौलिया क्षेत्र में बीडी और एलबी तटबंधों के किनारे नदी का दबाव बढ़ गया है।
कई स्थानों पर नदी की धारा खेतों की ओर बढ़ने से कटान हो रही है। आपदा प्रभावित गांवों में रुक-रुककर हो रही कटान से ग्रामीण सहमे हुए हैं। तटबंधों के संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
नदी और तटबंध के बीच बसे गांवों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित है। बच्चों को विद्यालय पहुंचाने और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ग्रामीण नाव का सहारा ले रहे हैं।
सुविका बाबू, टेड़वा, बिसुंदासपुर की अनुसूचित बस्ती, भुवरिया, सतहा, बलुइया और अशोकपुर के कई पुरवों के आसपास पानी बढ़ने से परेशानी बढ़ गई है। जलभराव और मौसम की मार के चलते बच्चों में मौसमी बुखार समेत अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
फसल डूबने से किसान परेशान
बाढ़ के पानी ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में लंबे समय से पानी भरा रहने से धान समेत अन्य फसलें प्रभावित हुई हैं। धान में बालियां निकलने का समय है।
किसानों का कहना है कि यदि फसल इसी तरह कई दिनों तक पानी में डूबी रही तो बालियां सड़ सकती हैं और पूरी फसल चौपट हो सकती है। नदी किनारे परवल और अन्य सब्जियों की व्यावसायिक खेती भी बर्बाद हो गई है।
किसान रामरूप, संदीप कुमार और श्यामलाल ने बताया कि नदी की कटान में खेती की जमीन लगातार बह रही है। खेतों में पानी भरने से तैयार फसलें नष्ट हो रही हैं। गांवों के चारों ओर पानी होने से आवागमन और रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हैं।
चारे के लिए भी नाव का सहारा
जलस्तर बढ़ने से पशुपालकों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। खेत और आसपास के इलाके जलमग्न होने के कारण हरे चारे के इंतजाम के लिए ग्रामीणों को नाव के सहारे नदी के उस पार जाना पड़ रहा है।
काफी मशक्कत के बाद पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था हो पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक प्रशासन की ओर से भूसे का वितरण भी नहीं किया गया है।
सिंचाई विभाग के बाढ़ कार्य खंड के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार ने बताया कि कुल 3,50,765 क्यूसेक पानी सरयू में छोड़ा गया है। इसमें गिरजा बैराज से 1,72,973, शारदा बैराज से 1,72,114 और सरयू बैराज से 5,678 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं।
