बरेली में उर्स पर देश में शांति के लिए हुई दुआ, ईद मिलादुन्नबी पर पाकिस्तान जैसे झंडे न लगाने की अपील
बरेली में आला हजरत के उर्स-ए-रजवी में देश की शांति के लिए दुआ की गई और कुल की रस्म अदा हुई। इस दौरान उलमा ने ईद मिलादुन्नबी पर पाकिस्तान जैसे झंडे न ल ...और पढ़ें

उर्स-ए-रजवी पर देश में शांति के लिए हुई दुआ।
HighLights
बरेली में आला हजरत के उर्स-ए-रजवी में कुल की रस्म अदा हुई।
देश में शांति के लिए दुआ की गई, जायरीनों ने चादरपोशी की।
ईद मिलादुन्नबी पर पाकिस्तान जैसे झंडे न लगाने की अपील।
जागरण संवाददाता, बरेली। आला हजरत के उर्स-ए-रजवी में शनिवार को कुल की रस्म अदा की गई। इस दौरान देश में शांति के लिए दुआ हुई। देश-विदेश से पहुंचे जायरीन ने दरगाह आला हजरत पर चादरपोशी भी की। इससे पहले उर्स स्थल इस्लामिया कालेज मैदान पर दोपहर को उलमा ने संबोधित किया।
मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने कहा कि 25 या 26 अगस्त को ईद मिलादुन्नबी होगी। उस दिन पाकिस्तान या अन्य देशों से मिलते-जुलते झंडे न लगाएं। जरूरी नहीं कि छत पर हरा झंडा लगे, यह सफेद या सुनहरा भी हो सकता है। किसी प्रकार का भ्रम न फैले, कानून का सख्ती से पालन करें। हमारे राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा का भी ध्यान रखें, उसमें किसी प्रकार का परिवर्तन कानूनी जुर्म है।
अल्लामा तौसीफ रजा और मौलाना साजिद रजा ने कौम की सुरक्षा और तरक्की के लिए शिक्षा को सबसे जरूरी बताया। उन्होंने अपील की कि भले ही निवाले कम खाएं, लेकिन बच्चों को आईएएस, आईपीएस, इंजीनियर और डाक्टर जरूर बनाएं।
कश्मीर से आए मौलाना फारूक नक्शबंदी ने कहा कि धर्म का ज्ञान इंटरनेट मीडिया से नहीं, बल्कि उलमा की किताबों से हासिल करें। मुफ्ती जिलानी ने कहा कि मुसलमानों में जागरुक होने की जरूरत है। एक उलमा चार साल और आला हजरत खानदान के सदस्य (मौलाना तौकीर) एक साल से जेल में बंद है। इसके बाद भी हमारे लोग गंभीर नहीं।