गौरव का पल! 24 हफ्तों की कड़ी ट्रेनिंग के बाद सेना का हिस्सा बने 1280 अग्निवीर, बरेली में हुई पासिंग आउट परेड
बरेली के जाट रेजिमेंट सेंटर में 1,280 अग्निवीरों ने 24 सप्ताह का प्रशिक्षण पूरा कर पासिंग आउट परेड में भाग लिया। ...और पढ़ें

जाट सेंटर के बख्शी परेड ग्राउंड में पासिंग आउट परेड की सलामी लेते जाट कमांडर ब्रिगेडियर हरजीत प्रीत पाल सिंह और जाट सेंटर के बख्शी परेड ग्राउंड में पासिंग आउट परेड में मंच के पास गुजरते जवान

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जागरण संवाददाता, बरेली। न डरूंगा तूफानों से, न झुकूंगा दुश्मन के आगे। भारत माता की रक्षा खातिर सीना तान खड़ा रहूंगा आगे। इन जोशपूर्ण पंक्तियों के साथ 1,280 अग्निवीरों ने तिरंगे की रक्षा की सौगंध ली।
रविवार को जाट रेजीमेंट सेंटर के बख्शी मैदान पर पासिंग आउट परेड के दौरान जाट बलवान, जय भगवान का उद्घोष भी गुंजायमान होता रहा। जाट रेजीमेंट के कमांडर ब्रिगेडियर हरजीत प्रीत पाल सिंह ने परेड की सलामी ली।

राजस्थान, हरियाणा, जम्मू, हिमाचल, मध्य प्रदेश, पंजाब व बिहार के 1,280 अग्निवीरों का 24 सप्ताह का प्रशिक्षण पूरा हो गया। परेड मैदान पर मेजर शैलेश मिश्रा ने उन्हें राष्ट्र की रक्षा की शपथ दिलाई। पंजाब होशियारपुर के अनिल कुमार नितेश ने अग्निवीर बनने का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत व माता-पिता को दिया।
कहा कि देश के सभी युवाओं को अपने राष्ट्र की चिंता करनी होगी। इसके लिए कर्तव्यों में ईमानदारी और मेहनत से कभी भी समझौता नहीं करें। अनिल के अग्निवीर बनने के बाद परेड ग्राउंड में मां शीला देवी की खुशी से आंसू छलक पड़े। इस दौरान उनके मामा मंजीत सिंह भी रहे।
आयोजित हुई पासिंग आउट परेड
हिमाचल के कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां निवासी शिवांश कटोच भी रविवार को अग्निवीर बन जाट रेजिमेंट का हिस्सा बन गए। शिवांश ने बताया कि उनके दादा भी सेना में थे और सेवा के दौरान ही हैंडीकैप हो गए, लेकिन उनकी इच्छा थी कि मैं सेना में जाऊं, फिर जैसा सोचा वैसा ही हुआ।

शिवांश कहते हैं कि बच्चा-बच्चा देश की सेवा को आगे आए। इस दौरान पिता विशाल सिंह, मां रीता आंचल, बहन सुनंदिता व फूफा डॉ. अजय भी पासिंग आउट परेड के साक्षी बने। बागपत जीवाणा गोलियान निवासी हर्ष सोलंकी अग्निवीर बनने के बाद अपने भाई व मित्रों के साथ खुशियों को साझा करते दिखे।
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हर्ष कहते हैं अनुशासन और उच्चाधिकारियों के मार्गदर्शन में 24 सप्ताह का ट्रेनिंग कब बीत गया कुछ पता ही नहीं चला। उन्होंने अपनी सफलता में हवलदार रामप्रताप और जाट कमांडर ब्रिगेडियर हरजीत प्रीतपाल सिंह द्वारा समय-समय पर दिए गए मार्गदर्शन को अहम बताया। हर्ष के पासिंग आउट परेड में शामिल होने के दौरान भाई आर्यन व अन्य रिश्तेदार भी रहे।
बुजुर्ग को देख भीड़ के बीच पहुंचे ब्रिगेडियर
अग्निवीरों के पासिंग आउट परेड के समापन के बाद जाट कमांडर ब्रिगेडियर हरजीत प्रीतपाल सिंह सेना के अन्य अफसरों के साथ परेड ग्राउंड से बाहर निकल रहे थे, तभी अग्निवीरों के स्वजन के बीच एक बुजुर्ग ने उनकी तस्वीर अपने मोबाइल में कैद करनी चाही।

बुजुर्ग द्वारा फोटो खींचता देख ब्रिगेडियर अग्निवीरों के स्वजन के बीच पहुंच गए। ब्रिगेडियर को अपने बीच पाकर बुजुर्ग ने उन्हें गले लगाने की कोशिश की। इस दौरान ब्रिगेडियर ने स्वजन को फोटो खींचने की अनुमति दी, इसके बाद बड़ी संख्या में लोग उनके निकट पहुंच गए।