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    मुख्तार अंसारी के एक और गुर्गे जफर की कुर्की से छूट की अर्जी खारिज, गैंगस्टर कोर्ट का फैसला

    Updated: Sat, 30 May 2026 06:59 PM (IST)

    गैंगस्टर कोर्ट ने मुख्तार अंसारी के सहयोगी जफर उर्फ चंदा की कुर्क संपत्ति को मुक्त करने की अर्जी खारिज कर दी है। ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, बाराबंकी। फर्जी एंबुलेंस पंजीकरण और गैंगस्टर एक्ट से जुड़े चर्चित मुख्तार अंसारी एंबुलेंस मामले में गैंगस्टर कोर्ट ने गिरोह के एक और आरोपित जफर उर्फ चंदा की कुर्क संपत्तियों की बहाली अर्जी खारिज कर दी है।

    शुक्रवार को गैंगस्टर एक्ट के विशेष न्यायाधीश विनय कुमार आर्या ने जिला गाजीपुर में कुर्क की गई संपत्ति को रिलीज की मांग को रद कर कोर्ट ने गंभीर बात कही। कहा कि अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति को कानून के तहत कुर्क किया जाता है, यहां प्रार्थी ने अपनी संपत्ति के वैध स्रोत का कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।

    मामला उस एंबुलेंस से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल मुख्तार अंसारी पंजाब की रोपड़ जेल सेपेशी पर आने-जाने में करता था। जांच में यह एंबुलेंस बाराबंकी में फर्जी दस्तावेजों पर पंजीकृत थी।

    राजफाश के बाद तत्कालीन एआरटीओ पंकज कुमार सिंह ने दो अप्रैल 2021 को मऊ निवासी अलका राय पर जालसाजी का मुकदमा किया था। बाद में 25 मार्च 2022 को मुख्तार अंसारी और जफर उर्फ चंदा समेत 13 लोगों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था।

    सुनवाई में जफर उर्फ चंदा की ओर से अदालत में दावा किया गया कि कुर्क की गई संपत्ति उसने वर्ष 2015 में जियाउद्दीन पुत्र अलीम खां निवासी मुहम्मदाबाद, गाजीपुर के साथ मिलकर खरीदी थी। कुल 49 लाख रुपये की संपत्ति में उसका एक-छठा हिस्सा था, जिसकी कीमत उसने करीब 8.16 लाख रुपये बताई।

    बचाव पक्ष ने कहा कि उसके पिता नगर पालिका परिषद मुहम्मदाबाद में लिपिक थे और रिटायरमेंट के बाद मिले फंड तथा खेती से हुई आय से उसने यह संपत्ति खरीदी थी। साथ ही यह भी कहा गया कि वर्तमान बाजार दरों के आधार पर संपत्ति का मूल्यांकन कर पुलिस ने गलत रिपोर्ट देकर कुर्की कराई।

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    हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जफर उर्फ चंदा के खिलाफ वर्ष 2001 से अब तक 12 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और वह अपनी कथित स्व अर्जित संपत्ति के संबंध में विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा। इसी आधार पर अदालत ने कुर्की आदेश निरस्त करने और संपत्ति मुक्त करने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी।