बांदा में सपा नेता के भाई गल्ला कारोबारी की संदिग्ध मौत, पुलिस ने जताई दुर्घटना की आशंका
बांदा में समाजवादी पार्टी के निवर्तमान जिला सचिव वीरेंद्र गुप्ता के बड़े भाई और गल्ला कारोबारी रामनरेश गुप्ता का शव रेलवे पटरी किनारे संदिग्ध परिस्थित ...और पढ़ें

HighLights
गल्ला कारोबारी रामनरेश गुप्ता का शव पटरी किनारे मिला।
पुलिस ने सिर में चोट के बाद दुर्घटना की आशंका जताई।
भाई ने रंजिश से इनकार किया, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार।
जागरण संवाददाता, बांदा। शहर के गायत्री नगर निवासी 50 वर्षीय गल्ला कारोबारी रामनरेश गुप्ता का शव सोमवार दोपहर करीब डेढ़ से दो बजे के बीच बांदा रेलवे स्टेशन से करीब एक किलोमीटर चित्रकूट-मानिकपुर की ओर आदर्श बजरंग इंटर कालेज के पास लोहिया ब्रिज के समीप रेलवे पटरी किनारे मिला।
वह रविवार शाम करीब चार बजे पान खाने की बात कहकर पैदल घर से निकले थे और रातभर वापस नहीं लौटे थे। रामनरेश समाजवादी पार्टी के निवर्तमान जिला सचिव वीरेंद्र गुप्ता के बड़े भाई थे।
पुलिस के अनुसार, सिर के दाहिने हिस्से में एक जगह चोट मिली है। दुर्घटना की आशंका जताई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का कारण स्पष्ट होगा। इंटरनेट मीडिया पर हत्या की चर्चाएं रहीं, लेकिन भाई वीरेंद्र ने किसी से रंजिश और हत्या की साजिश से इनकार किया है।
रामनरेश बाबूलाल चौराहे पर अपने निजी मकान में गल्ला आढ़त चलाते थे। छोटे भाई वीरेंद्र के अनुसार दुकान में करीब 10-12 दिन से मरम्मत का काम चल रहा था, इसलिए कारोबार बंद था। परिवार गायत्री नगर में ही रहता है।
उन्होंने बताया कि रामनरेश अत्यधिक शराब पीते थे और कभी-कभी एक-दो दिन के लिए घर से बाहर भी रहते थे। रविवार को वह पत्नी आरती गुप्ता, बेटे 18 वर्षीय शुभम और बेटी 19 वर्षीय स्नेहा से पान खाने की बात कहकर निकले थे। मोबाइल साथ नहीं ले गए थे, उनका मोबाइल बेटे के पास था।
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वीरेंद्र ने बताया कि वह रविवार को लखनऊ गए थे और सोमवार सुबह करीब 11 बजे लौटे। घर पहुंचने पर भाई के लापता होने की जानकारी मिली तो स्वजन के साथ तलाश शुरू की। दोपहर में रेलवे पटरी किनारे शव मिलने की सूचना पर वह मौके पर पहुंचे।
उप स्टेशन प्रबंधक रामप्रकाश यादव के अनुसार एसएससी आरती मीना ने रेलवे पटरी किनारे शव पड़े होने की सूचना दी। जीआरपी थाना प्रभारी हरीनाथ ने टीम भेजकर मौके की जांच कराई। रामनरेश के परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। उनके पास खेती की जमीन नहीं थी और आढ़त का कारोबार ही परिवार की आय का मुख्य साधन था।