बुंदेलखंड में सपा की बढ़ी मुश्किलें, बांदा में सांसद और विधायक के बीच आर-पार; अखिलेश यादव तक पहुंचा मामला
बुंदेलखंड में लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने वाली समाजवादी पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अंदरूनी कलह में उलझ गई है। ...और पढ़ें

पूर्व सीएम अखिलेश यादव। (फाइल फोटो)
HighLights
बांदा में सपा सांसद-विधायक के बीच तीखी बहस।
अखिलेश यादव ने बांदा जिला कार्यकारिणी भंग की।
चित्रकूट, हमीरपुर में भी सपा संगठन में कलह।
विमल पांडेय, बांदा। बुंदेलखंड में बीते लोकसभा चुनाव के दौरान अच्छा प्रदर्शन कर तीन सीटें जीतने वाली समाजवादी पार्टी वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही अंदरूनी कलह में उलझती दिख रही है।
गुटबाजी की सुगबुगाहट के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 12 मई को बांदा की जिला कार्यकारिणी भंग कर दी थी। अब बांदा-चित्रकूट की सपा सांसद कृष्णा पटेल और बबेरू से उन्हीं की पार्टी के विधायक विशंभर सिंह यादव के बीच शुक्रवार को जमकर बहस हुई।
मामला अखिलेश यादव तक पहुंच गया है। निवर्तमान जिलाध्यक्ष डॉ. मधुसूदन कुशवाहा का कहना है कि गुटबाजी नहीं है। सांसद-विधायक के बीच कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद थे, जो दूर कर लिए गए हैं। उधर, चित्रकूट और हमीरपुर में भी संगठन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा।
लोकसभा चुनाव में सपा ने जालौन, बांदा-चित्रकूट और हमीरपुर-महोबा सीट पर जीत हासिल की थी। बबेरू, बांदा की इकलौती विधानसभा सीट है, जहां सपा के विधायक हैं।
दो महीने पहले ही शुरू हो गई थी पटकथा
जिले में सपा में आपसी झगड़े की पटकथा दो माह पहले लिखनी शुरू हो गई थी। देश में बांदा का सर्वाधिक तापमान 48 डिग्री सेल्सियस पहुंचने के बाद अखिलेश यादव ने अवैध खनन, पौधारोपण जैसे विषयों पर खुद तो सरकार को घेरा ही, संगठन से भी मुखर होने को कहा।
विधायक विशंभर सिंह यादव ने 14 जून को प्रेसवार्ता की और भीषण गर्मी की आड़ में अपनी ही पार्टी के सांसद के पति शिवशंकर पटेल की अवैध खनन में संलिप्तता का मुद्दा भी उठा दिया।
अगले ही दिन सांसद कृष्णा पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें जिलाध्यक्ष डॉ. मधुसूदन कुशवाहा, राष्ट्रीय महासचिव पूर्व सांसद विशंभर प्रसाद निषाद समेत पार्टी के तमाम छोटे-बड़े नेता शामिल हुए।
उनके पति ने पार्टी के ही लोगों पर उन्हें बदनाम करने व अवैध खनन में संलिप्त होने के मिथ्या आरोप लगाने की बात कही थी। तब से सांसद-विधायक के बीच जंग जारी है।
जिलाध्यक्ष और विधायक के बीच मनमुटाव
चित्रकूट में जिलाध्यक्ष शिवशंकर सिंह पटेल और सदर विधायक अनिल प्रधान के बीच अंदरखाने मनमुटाव है। पूर्व जिलाध्यक्ष अनुज पटेल का गुट भी अलग है। हालांकि तीनों इससे इनकार करते हैं।
हमीरपुर में तत्कालीन जिलाध्यक्ष राजबहादुर हत्या के मामले में जेल गए थे, जिसके बाद इदरीश खान को जिलाध्यक्ष बनाया गया था। तब से दोनों के बीच अंदरूनी कलह चल रही है।
जालौन में वैसे तो संगठन में कोई कलह नहीं है, लेकिन टिकट के चक्कर में दावेदार एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं। पिछले दिनों में महंगाई को लेकर प्रदर्शन में 250 सपाइयों पर मुकदमा दर्ज हुआ था, लेकिन सांसद नारायण दास अहिरवार पर कार्रवाई नहीं होने से कलह सामने आ गई थी।
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कोई मतभेद नहीं
हालांकि, जिलाध्यक्ष दीपराज गुर्जर का कहना है कि कोई मतभेद नहीं है। महोबा की सदर सीट पर एक पूर्व मंत्री की सक्रियता से उन पदाधिकारियों की बेचैनी बढ़ गई है, जो टिकट की दौड़ में शामिल हैं। बबेरू में ही सांसद का निवास है।
वहीं, पर विधायक विशंभर यादव का भी वर्चस्व है। यहीं से चित्रकूट एवं बांदा की अन्य विधानसभा क्षेत्र की सीटों पर सियासत की गोटें बिछाई जाती हैं।
तीन माह पहले जालौन के सांसद नारायण दास अहिरवार के एक जाति पर दिए गए बयान से पार्टी की किरकिरी हुई तो महोबा-हमीरपुर सांसद अजेंद्र सिंह लोधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अमर्यादित टिप्पणी कर दी। मामला कई दिन गर्म रहा।