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बलिया: एक रात में नदी में समाए नौ लोगों के आशियाने, कटान की दहलीज पर कई मकान

Published: Fri, 31 Jul 2026 07:33 PM (IST)

बलिया में सरयू नदी के तेज कटान से एक ही रात में नौ लोगों के आशियाने नदी में समा गए, ...और पढ़ें

एक रात में नौ लोगों के आशियाने नदी में समाए।

एक रात में नौ लोगों के आशियाने नदी में समाए।

HighLights

  1. गोपाल नगर टाड़ी में नौ घर नदी में समाए।

  2. प्राथमिक विद्यालय का अस्तित्व भी सरयू में विलीन।

  3. ग्रामीणों ने कटान रोकने की मांग को लेकर प्रदर्शन की तैयारी।

जागरण संवाददाता, बैरिया (बलिया)। तेज पुरवाई हवा के चलते सरयू नदी का कटान दियरांचल में और तेज हो गया है। गोपाल नगर टाड़ी में एक ही रात में नौ लोगों के आशियाने नदी में समा गए, जबकि आधा दर्जन से अधिक मकान अब भी कटान के मुहाने पर हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं।

24 घंटे के अंदर जिन लोगों के मकान नदी में विलीन हुए हैं, उनमें झलखू यादव, उदय यादव, काशीनाथ यादव, सोमारू यादव, रोशन यादव, चंदन यादव, श्याम बिहारी यादव, पशुपति यादव और दीपक यादव शामिल हैं। वहीं शंभूनाथ यादव, ललन यादव, मकरध्वज यादव, परशुराम यादव, सुदर्शन यादव और लालजी यादव के मकान भी कटान के खतरे में हैं।

गुरुवार देर रात प्राथमिक विद्यालय गोपाल नगर टाड़ी का शेष भाग भी सरयू में समाहित हो गया। इसके साथ ही विद्यालय का अस्तित्व समाप्त हो गया। कटान की गंभीर स्थिति को देखते हुए पहले ही विद्यालय को जूनियर हाईस्कूल गोपाल नगर परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था।

ग्रामीणों का कहना है कि दो वर्ष पहले भी कई परिवारों के मकान नदी में समा गए थे। विस्थापित लोगों ने एक किलोमीटर दूर दोबारा आशियाना बनाया था, लेकिन अब वह भी सरयू में विलीन हो गया। कटान पीड़ितों के सामने रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। कटान की तेज रफ्तार को देखते हुए बिजली विभाग ने गोपाल नगर टाड़ी में लगाए गए बिजली के खंभे और तार हटा लिए हैं।

विभाग का कहना है कि यदि बिजली लाइन पानी के संपर्क में आई तो बड़ा हादसा हो सकता है। उधर, दियरांचल के ग्रामीणों ने कटान रोकने की मांग को लेकर शनिवार को बैरिया तहसील पर धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कटान रोकने के लिए किए गए कार्यों में लापरवाही बरती गई है।

उप जिलाधिकारी ने बताया कि कटान पीड़ितों को गृह अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है और उन्हें बसाने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। लेखपाल की रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक सप्ताह में करीब 32 बीघा जमीन सरयू नदी में समाहित हो चुकी है।

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