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UP के गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाले डॉ. रामकरण दुनिया के टॉप 5% वैज्ञानिकों में शामिल

By Rajeev Kumar Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 08 Oct 2026 06:03 PM (IST)

बागपत के ट्योढ़ी गांव के वैज्ञानिक डाॅ. रामकरण शर्मा को साइरैंक ग्लोबल साइंटिस्ट इंडेक्स-2025 में दुनिया के शीर्ष पांच प्रतिशत ...और पढ़ें

वैज्ञानिक डाॅ. रामकरण शर्मा। सौ. स्वयं

वैज्ञानिक डाॅ. रामकरण शर्मा। सौ. स्वयं

HighLights

  1. डा. रामकरण साइरैंक ग्लोबल साइंटिस्ट इंडेक्स-2025 में शीर्ष 5% में।

  2. प्रदूषण, पर्यावरण संरक्षण और मंगल पर जीवन पर महत्वपूर्ण शोध।

  3. बागपत के ट्योढ़ी गांव से आईआईटी तक का प्रेरणादायक सफर किया तय।

जागरण संवाददाता, बड़ौत (बागपत)। ट्योढ़ी गांव के रहने वाले वैज्ञानिक डाॅ. रामकरण शर्मा ने एक बार फिर जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर डा. रामकरण शर्मा को साइरैंक ग्लोबल साइंटिस्ट इंडेक्स-2025 में दुनिया के शीर्ष पांच प्रतिशत वैज्ञानिकों में स्थान मिला है। उनके शोध कार्यों और वैज्ञानिक योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली यह मान्यता क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।

साइरैंक ग्लोबल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिकों के शोध कार्यों और उनके प्रभाव का आकलन करता है। इसमें वैज्ञानिकों के शोध प्रकाशन, उनके कार्यों का अन्य वैज्ञानिकों द्वारा संदर्भित किया जाना और शोध के वैज्ञानिक प्रभाव जैसे विभिन्न पहलुओं को आधार बनाया जाता है।

इसी वैश्विक आकलन में डाॅ. रामकरण शर्मा ने शीर्ष पांच प्रतिशत वैज्ञानिकों में जगह बनाई है। डाॅ. शर्मा का शोध कार्य प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है। उनका वैज्ञानिक कार्य प्रदूषण कम करने, पर्यावरण संरक्षण, उपयोगी एंजाइमों की खोज और विषम परिस्थितियों में जीवन की संभावनाओं जैसे विषयों से जुड़ा रहा है। उन्होंने नासा के सहयोग से मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना से संबंधित शोध में भी योगदान दिया है।

सरकारी स्कूल से आईआईटी दिल्ली तक सफर

डाॅ. रामकरण शर्मा की प्रारंभिक शिक्षा ट्योढ़ी के सरकारी प्राथमिक विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने सरूरपुर इंटर कालेज से कक्षा छह से 12 तक की पढ़ाई की। फिर जनता वैदिक कालेज, बड़ौत से बीएससी और एमएससी की। उच्च शिक्षा के लिए वह आईआईटी दिल्ली पहुंचे, जहां से उन्होंने पीएचडी की।

शोध कार्यों के सिलसिले में उनका सफर अमेरिका, इटली, रोमानिया, ग्रीस, स्पेन, जापान और सऊदी अरब तक पहुंचा। लगभग 13 वर्ष विदेश में रहने के बाद वह भारत लौटे और वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन के साथ शोध कार्य कर रहे हैं।

उन्हें जापान में युवा वैज्ञानिक पुरस्कार, इटली में सर्वश्रेष्ठ शोध एवं शोध में रचनात्मकता सम्मान और आईआईटी दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ शोध प्रकाशन सम्मान सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।