बागपत अग्निकांड : तड़पती रहीं मां-बेटी, दर्शक की तरह देखती रही पुलिस, तमाशबीन बने जलते मकान का वीडियो बनाते रहे लोग
बागपत में एक मकान में आग लगने से मां-बेटी की दर्दनाक मौत हो गई, जहां पुलिस पर तमाशबीन बने रहने ...और पढ़ें

HighLights
बागपत में घर में आग से मां-बेटी की दर्दनाक मौत।
पुलिस और भीड़ पर तमाशबीन बने रहने का गंभीर आरोप।
पूर्व फौजी ने जान बचाने का अथक प्रयास किया, पर असफल।
जागरण संवाददाता, बागपत। मकान में आग की लपटें उठ रही थीं। मां-बेटी अंदर तड़प रही थीं। लेकिन राहत-बचाव के प्रशिक्षण का दम भरने वाली खाकी भी तमाशबीन बनी रही। पूर्व फौजी सुभाष कश्यप सामने आए, लेकिन उनके अथक प्रयास से भी मां-बेटी की जान नहीं बच सकी। इस दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर दिया।
बाजार चौकी से 100 कदम पहले पाठशाला रोड पर व्यापारी विनय जैन का मकान है। करीब दो किमी की दूरी पर फायर स्टेशन है। आग लगने पर मकान के बाहर भीड़ एकत्र हुई तो पुलिसकर्मी भी वहां पर पहुंच गए थे। कोई भी मकान के अंदर से मां-बेटी को बाहर निकालने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। अचानक बाजार में आटा खरीदने पहुंचे कस्बा निवासी सुभाष कश्यप को जैसे ही जानकारी मिली, वह बाइक लेकर उस मकान की ओर दौड़ पड़े।
वह बताते हैं कि जब वहां पहुंचे तो मकान के बाहर पुलिस और सैकड़ों लोगों की भीड़ थी, जो आग की घटना को देख रहे थे। कई लोग मोबाइल से वीडियो बनाने के साथ फोटो भी खींच रहे थे। जब उन्हें पता चला कि मकान में मां-बेटी मौजूद हैं तो मकान के अंदर प्रवेश करने का रास्ता तलाशा। करीब 50 मीटर की दूरी पर एक मकान के बराबर में सीढ़ियां दिखाई दीं, जिसके माध्यम से कई मकानों की छत से होते हुए व्यापारी विनय जैन के मकान की छत पर पहुंचे।
वहां पर पहुंचने के लिए दो मंजिला भवन से छत पर छलांग भी लगाई। उन्होंने लोगों से कहा कि हथौड़ा आदि लेकर आ जाओ। इसके बाद पुलिस और अन्य लोग मकान की छत पर पहुंचे, जिन्होंने सीढ़ियों का दरवाजा, पड़ोसी के मकान की दीवार और लोहे का जाल तोड़कर मकान की पहली मंजिल पर प्रवेश किया, लेकिन मां-बेटी की जान नहीं बच सकी।
उधर, एएसपी प्रवीण सिंह चौहान का कहना है कि हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। रेस्क्यू कर मकान से मृत मां-बेटी को बाहर निकाला गया। वहीं, मुख्य अग्निशमन अधिकारी अमरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि हादसे की सुबह 8.11 बजे सूचना मिली थी। छह मिनट बाद टीम मौके पर पहुंच गई थी। करीब पांच मिनट में ही आग बुझाई गई।
जिंदगी और मौत के बीच 30 मिनट का फासला
कपिल कुमार, बागपत। कारोबारी विनय जैन के परिवार ने सपने में भी ऐसा नहीं सोचा होगा कि ऐसा समय भी आएगा। बिजली की चिंगारी से महज 30 मिनट में परिवार पर गम का ऐसा पहाड़ टूटा कि जीवन भर भूला नहीं पाएंगे। हंसते-खेलते परिवार पर मौत ने ऐसा झपट्टा मारा कि दो जिंदगी खत्म हो गईं। घर से जो बाहर था, वह सुरक्षित रहा लेकिन घर में सुरक्षित कहे जाने वाले ही असुरक्षित हो गए। विनय अग्रवाल हर रोज की तरह गुरुवार सुबह अपनी पत्नी के साथ मंदिर में पूजा करने गए थे।
बेटा अंकुर जैन दुकान खोल रहा था। इससे पहले मिस्त्री से घर के सबमर्सिबल की मरम्मत कराई गई थी। पौत्र भी स्कूल चला गया था। पौत्री स्कूल जाने की तैयारी कर रही थी। अचानक बिजली की चिंगारी ने घर की खुशियां मातम में बदल दी। सुबह आठ बजे गैलरी के बोर्ड में बिजली की चिंगारी उठी और आसपास रखे सामान पर गिर गई, जिससे सामान जलता चला गया।
अंकुर जैन ने हल्के में लेते हुए खुद ही आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग बढ़ती चली गई। फायर ब्रिगेड को 8.11 बजे सूचना दी गई। स्थानीय स्टेशन से 8.17 बजे दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे। आग ज्यादा लगी देख बागपत और बड़ौत स्टेशन से भी स्टाफ बुलाया गया। कुल पांच गाड़ियों के साथ कर्मचारियों ने आग पर काबू पाया।
8.30 बजे तक अंकुर की पत्नी और बेटी की जान जा चुकी थी तथा कई लोग घायल हो गए थे। उधर, मुख्य अग्निशमन अधिकारी अमरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि हादसे की थोड़ी देरी से सूचना मिली है, वह खुद मौके पर पहुंचे। मां-बेटी को रेस्क्यू कर आग बुझाई गई। व्यापारी विनय जैन को मंदिर से लौटते समय घटना का पता चला। इसके बाद उनकी भी हालत बिगड़ गई। पीड़ित स्वजन व अन्य लोगों ने उनका ढांढस बंधाया।
शत प्रतिशत झुलसी महिला मां-बेटी
दो चिकित्सकों के पैनल ने मां-बेटी के शवों का पोस्टमार्टम किया। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक मां-बेटी शत प्रतिशत झुलस गई थी। इसी वजह से उनकी जान गई है। ऊर्जा निगम के एक्सईएन रवि यादव का कहना है कि डीएम के निर्देश पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जाएगी।
