महज 10 साल का था कार्तिक; दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर 25 मीटर घसीटते ले गई कार, बुझ गया इकलौता चिराग
बागपत में दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर कांवड़ सेवा शिविर जा रहे 10 वर्षीय कार्तिक को तेज रफ्तार कार ने 25 मीटर तक घसीटा, जिससे उसकी मौत हो गई। ...और पढ़ें

बागपत पोस्टमार्टम हाउस पर रोते बिलखते कार्तिक के स्वजन। जागरण
HighLights
10 वर्षीय कार्तिक को कार ने 25 मीटर तक घसीटा।
सहारनपुर हाईवे पर हुए हादसे में बालक की मौत।
इकलौते बेटे की मौत से परिवार और गांव में शोक।
जागरण संवाददाता, बागपत। कांवड़ सेवा शिविर में जाते समय एक व्यक्ति के इकलौते बेटे को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर ग्राम खेड़की के निकट तेज रफ्तार कार टक्कर मारते हुए 25 मीटर घसीटते हुए ले गई। हादसे में बालक की मौत हो गई। कार का साढ़े तीन किमी पीछा भी किया गया, लेकिन पकड़ी नहीं गई। हादसे से गांव में शोक छा गया। लोगों की आंखों से आंसू छलक आए। वहीं पुलिस ने जांच कर बच्चे के शव को कब्जे में लिया।

ग्राम खेड़की के प्रशासक आशीष शर्मा के मुताबिक गांव के रामकुमार उर्फ मोनू ट्रक पर ईंट ढुलाई का कार्य करते हैं। राजकुमार के परिवार व मुहल्ले के कुछ लोगों ने मिलकर गांव के इंटरमीडिएट कालेज के पास कांवड़ सेवा शिविर लगा रखा है। रामकुमार का बेटा 10 वर्षीय कार्तिक शनिवार शाम करीब तीन बजे शिविर में जा रहा था। इसी दौरान बड़ौत की ओर से तेज गति से आई सफेद रंग की हुंडई कार ने कार्तिक को टक्कर मार दी।
करीब 20-25 मीटर घसीटते हुए ले गया। इसके बाद आरोपित चालक कार को लेकर भाग गया, जिसका ग्राम लधवाड़ी मोड़ तक पीछा किया गया, लेकिन कार पकड़ी नहीं गई। वहीं आनन-फानन में बालक को जिला अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने कार्तिक को मृत घोषित किया। वहीं पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की। उधर, कोतवाली प्रभारी मनोज कुमार चाहल का कहना है कि हादसे में बालक की मृत्यु हुई है। तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
बुझ गया घर का चिराग
स्वजन के मुताबिक कार्तिक कक्षा छह में पढ़ता था। वह तीन बहनों का अकेला भाई थी। वह बहुत ही होनहार था। पढ़ाई के साथ-साथ धार्मिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। अधिकांश समय कांवड़ सेवा शिविर में ही गुजारता था, जहां पर कांवड़ियों की सेवा करता था। उसकी मौत से परिवार में कोहराम मचा है। पीड़ित स्वजन को सांत्वना देने वालों का घर पर तांता लगा है। गांव का शोक छाया है। कई घरों के तो चूल्हे भी नहीं जले।