राम मंदिर के टॉयलेट में रुपये मिलने के बाद हुआ था चढ़ावा चोरी का खुलासा, 17 घंटे में बरामद हुए थे 81 लाख
राम मंदिर चढ़ावा मामले में 40 हजार रुपये से शुरू हुई बरामदगी 17 घंटे में 81 लाख रुपये तक पहुंच गई। ट्रस्ट महासचिव चंपत राय की सक्रियता और पुलिस की जां ...और पढ़ें

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रवीण तिवारी, अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी कब से शुरू हुई, इसकी सटीक जानकारी किसी को नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच इस रहस्य से पर्दा उठा सकती है।
सीसीटीवी कैमरे का रिकॉर्ड भी मात्र 45 दिन का उपलब्ध है। ऐसे में आरोपित ही बता सकते हैं कि उन्होंने मिलकर कितने रुपये पार किए हैं। उनके बयान सहित पुलिस की विवेचना में यह सच सामने आएगा।
चढ़ावा चोरी की घटना में पहले बरामद होने वाली धनराशि 40 हजार रुपये थी, जो राम मंदिर के शौचालय में से मिली थी। गेट कीपर ने जब बाथरूम में नोट देखे, तो उसने फौरन ही ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय को इसकी जानकारी दी। चंपत राय मंदिर आए और इसकी सूचना तुरंत सुरक्षा अधिकारियों के अलावा ट्रस्टियों को भी दी।
सभी के सामने हुई थी आरोपितों की तलाशी
चार जून 2026 को यह ये मामला संज्ञान में आया था। ट्रस्ट महासचिव ने पुलिस अधिकारियों को इससे अवगत कराया। इसी के बाद ही धनराशि के बरामदगी का सिलसिला प्रारंभ हुआ। शुरू में सभी के सामने आरोपितों की तलाशी हुई थी।

17 घंटे में 81 लाख रुपये नकदी बरामद
इस प्रारंभिक कार्रवाई से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि सिर्फ 17 घंटे में ही ट्रस्ट के समन्वय से आरोपितों के घरों से अयोध्या के अलावा बहराइच के नानपारा, प्रतापगढ़ के कुंडा और कई अन्य जगहों से नकदी बरामद हुई थी। आरोपितों में रमाशंकर मिश्रा का घर बहराइच के नानपारा व अविनाश शुक्ला का पैतृक घर प्रतापगढ़ में है।
-1783637522040_v-1784096970856.webp)
इसके अतिरिक्त अनुकल्प मिश्रा, उसके संबंधी लवकुश व नाका निवासी करुणेश की निशानदेही पर अलग-अलग स्थानों से कुल 81 लाख 19 हजार रुपये बरामद किए गए। ट्रस्ट की पहल पर शुरू हुई प्रारंभिक कार्रवाई में चंपत राय, गोपाल राव, डॉ. अनिल मिश्रा सहित जिले के कुछ पुलिस अधिकारी भी शामिल रहे।
खबरें और भी
21 लोगों की टीम मिलकर लगी थी जांच में
इस मामले में हुई प्रारंभिक कार्रवाई में कुल 21 लोगों की टीम जुटी थी। गणना स्थल पर चोरी होने की सूचना सबसे पहले तत्कालीन महासचिव चंपत राय को दी गई थी।
इसके बाद वह सक्रिय हुए और तत्काल मंदिर में अपने करीबियों व ट्रस्टियों को तलब कर इस घटना पर आक्रोश व्यक्त किया और ट्रस्ट की धनराशि की रिकवरी शुरू कराई।

इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर नहीं छोड़ा। बताया जा रहा है कि नकेल कसी गई तो आरोपितों के कुछ अभिभावक अपने स्वजनों को बचाने के लिए चोरी की धनराशि लेकर मंदिर पहुंचे और ट्रस्ट के सुपुर्द किया किया।
यह जानकारी ट्रस्ट के अलावा पुलिस के कुछ अफसरों को भी थी, लेकिन इस बारे में अब तक चंपत राय न तो अधिकृत रूप से बोल रहे हैं और न ही पुलिस अधिकारी।
यह भी पढ़ें- श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए 24 घंटे में एक हजार से अधिक आवेदन, 22 जुलाई को लग सकती है मुहर