राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपी सुभाष को कोर्ट से बड़ी राहत, पेंशन खाते पर लगी रोक हटी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपित पूर्व बैंक कर्मी सुभाषचंद्र श्रीवास्तव को न्यायालय से बड़ी राहत मिली है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का आरोपी सुभाष।

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जागरण संवाददाता, अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी में आरोपित पूर्व बैंक कर्मी सुभाषचंद्र श्रीवास्तव को पेंशन खाते के मामले में न्यायालय से बड़ी राहत मिली है।
लगभग डेढ़ माह से विचाराधीन उनकी अर्जी पर विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा ने पेंशन खाते को अनफ्रीज करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने आदेश की प्रति बैंक को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजने का निर्देश भी दिया है।
लगभग डेढ़ माह में कई कानूनी जोरआजमाइश के बाद सुभाष को आखिरकार सफलता मिल गई। इस मामले में पुलिस क्षेत्राधिकारी अयोध्या व विवेचक आशुतोष तिवारी जून 2026 से सुभाष के पेंशन खाते के लेनदेन को लेकर अपनी अनापत्ति पहले ही दे चुके हैं।
हालांकि, पांच सितंबर को दी अर्जी में उन्होंने कहा कि पेंशन खाते में कोई संदिग्ध धनराशि क्रेडिट नहीं पाई गई है। पेंशन खाता को अनफ्रीज किये जाने में कोई आपत्ति नहीं है।
प्रकरण में सुभाष की ओर से बीती 18 जुलाई को अर्जी देकर पेंशन खाते से रोक हटाने की गुहार लगाई गई थी। उनका कहना था कि हर माह मिलने वाली पेंशन ही उनके परिवार के भरण-पोषण, पत्नी के उपचार, ईएमआई और अन्य जरूरी खर्चों का मुख्य साधन है।
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पेंशन खाता अर्जी पर सुनवाई एक नजर में
- 18 जुलाई को न्यायालय में दी अर्जी, 21 जुलाई को आख्या तलब
- 23 जुलाई को न्यायालय ने विवेचक की आख्या को संतोषजनक न पाते हुए 27 जुलाई को स्पष्ट आख्या मांगी
- 27 जुलाई को सुभाष को मिली थी आंशिक राहत, जून 2026 के बाद की राशि हुई थी अवमुक्त
- 30 जुलाई को सुभाष ने अपने खाते के लेनदेन का पाई-पाई हिसाब न्यायालय में दिया, अभियोजन ने मौका लिया
- तीन अगस्त को अभियोजन ने खाते की बड़ी राशियों को संदिग्ध बताते हुए पत्राचार जारी रहने की बात कही
- पांच अगस्त को नहीं हो सका था खाते का सत्यापन
- 11 अगस्त को विवेचक ने बताया कि कुछ राशियां सुभाष के ही अन्य खाते से हुई थी स्थानांतरित
- 13 अगस्त को विवेचक हुए थे तलब, 18 अगस्त को पत्रावली आदेश में हुई सुरक्षित
- 25 अगस्त को दाेनों पक्षों को मिला विधि व्यवस्था प्रस्तुत करने का मौका
- एक सितंबर को टला था आदेश, बचाव पक्ष को मिला था मौका
