जमीन पर बैठकर खाना अब बीती बात! कांवड़ियों की सेवा में आया 'VIP कल्चर', टेबल पर सज रहे गरम हलवा-जलेबी
कांवड़ यात्रा में शिवभक्तों की सेवा का अंदाज बदला है, अब भंडारों में जमीन की बजाय टेबल पर वीआईपी तरीके से भोजन परोसा जा रहा है। जलेबी, हलवा, पकौड़ी और ...और पढ़ें

बुलंदशहर की सेवा समिति द्वारा आयोजित वीआईपी भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते शिव भक्त।जागरण
HighLights
चाय-काफी से लेकर जलेबी-हलवा तक की व्यवस्था
नवीन वर्मा, मंडी धनौरा (अमरोहा)। आस्था की राह पर बढ़ते शिवभक्तों के स्वागत और सेवा का अंदाज भी समय के साथ बदल रहा है। पहले जहां कांवड़ियों को जमीन पर बैठाकर भोजन कराया जाता था, वहीं अब भंडारों में टेबल लगाकर बड़े आयोजनों की तरह उनकी आवभगत की जा रही है। चाय-कॉफी से लेकर जलेबी, हलवा, पकौड़ी और विभिन्न प्रकार के व्यंजन परोसे जा रहे हैं। भंडारों का यह नया स्वरूप शिवभक्तों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
11 अगस्त को महाशिवरात्रि के मद्देनजर हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्त बिजनौर जनपद की सीमा से सटी रसूलपुर पुलिस चौकी होते हुए गजरौला-चांदपुर बाईपास मार्ग से गुजर रहे हैं। महाशिवरात्रि नजदीक आने के साथ कांवड़ियों की संख्या भी बढ़ रही है। धनोरा व बछरायूं क्षेत्र में करीब एक दर्जन स्थानों पर भंडारे लगाए गए हैं। इनमें कई जगह सेवा का अंदाज ‘वीआईपी’ जैसा दिखाई दे रहा है।

बछरायूं क्षेत्र के गांव जोगीपुरा में बुलंदशहर की संस्था शिव कांवड़ सेवा समिति की ओर से हर वर्ष कांवड़ियों के लिए भंडारा लगाया जाता है। यहां टेबल लगाकर शिवभक्तों को भोजन कराया जा रहा है। जलेबी, हलवा, पकौड़ी, चाय-कॉफी समेत विभिन्न व्यंजनों की व्यवस्था की गई है। ट्रस्ट की ओर से भंडारे का पूरा खर्च स्वयं वहन किया जाता है।
उधर, ग्राम छितरा स्थित किसान भवन, चुचैला कलां में ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से भंडारा लगाया है। गोलघर चौराहे पर भी स्थानीय लोगों की ओर से कांवड़ियों की सेवा की जा रही है। भंडारों में धार्मिक भजनों के लिए डीजे लगाए गए हैं। प्रसाद ग्रहण करने के बाद शिवभक्त थकान भूलकर भक्ति में झूमते और नाचते नजर आ रहे हैं।
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भंडारा संचालक ओमकार ने बताया कि पहले शिवभक्तों को जमीन पर बैठाकर भोजन कराया जाता था। अब टेबल लगाकर भोजन परोसा जा रहा है, जिससे कांवड़ियों को अपनी पसंद का प्रसाद लेने में सुविधा हो रही है।
श्रद्धालु पवन ने बताया कि भंडारे में जलेबी, हलवा, पकौड़ी, चाय-काफी समेत कई तरह के व्यंजन रखे गए हैं। समय के साथ भंडारों के तौर-तरीके बदले हैं, लेकिन शिवभक्तों की सेवा और सत्कार की भावना आज भी वही है।
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