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    'आजादी यूं ही नहीं मिली...' गांधी जी के साथ हैदराबाद जेल में बंद रहे ओमप्रकाश शास्त्री की अनकही कहानी

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 03:55 PM (GMT+05:30)

    दैनिक जागरण के 'वीरों को वंदन विरासत को नमन' अभियान के तहत स्वतंत्रता सेनानी ओमप्रकाश शास्त्री के बेटे मृदुल अग्रवाल ने अपने पिता की कहानी साझा की। शा ...और पढ़ें

    हसनपुर में अपने पापा का फोटो व कागजात दिखाते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओमप्रकाश के पुत्र मृदुल अग्रवाल पुत्रवधू अलका अग्रवाल जागरण

    हसनपुर में अपने पापा का फोटो व कागजात दिखाते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओमप्रकाश के पुत्र मृदुल अग्रवाल पुत्रवधू अलका अग्रवाल जागरण

    HighLights

    1. पिता की वीरता की कहानी सुनाते हुए भावुक हुए मृदुल अग्रवाल

    2. अंग्रेजों भारत छोड़ो और असहयोग आंदोलन में रहे थे शामिल

    संवाद सहयोगी, हसनपुर (अमरोहा)। दैनिक जागरण के वीरों को वंदन विरासत को नमन अभियान के तहत रविवार को दैनिक जागरण की टीम ने नगर के मुहल्ला कायस्थान निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय ओमप्रकाश शास्त्री के घर पहुंचकर उनके पुत्र सेवानिवृत बैंक प्रबंधक मृदुल अग्रवाल से बात की। पिता की वीरता की कहानी सुनाते हुए वह भावुक हो गए।

    बताया कि देश को आजादी यूं ही नहीं मिली है बल्कि, इसके अनेकों बलिदान शामिल हैं। पिता का सर्टिफिकेट और उनकी तस्वीर हाथ में लेकर पत्नी अलका अग्रवाल के साथ दिखाते हुए बेटे ने बताया कि उनके पिता ओमप्रकाश शास्त्री ने लाहौर यूनिवर्सिटी से डबल एमए करने के बाद गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर हरिद्वार में अधिष्ठाता थे।

    वर्ष 1922 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन एवं वर्ष 1941 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ काफी समय तक हैदराबाद और उस्मानाबाद की जेलों में बंद रहे थे।

    उनके तीन बेटे प्रफुल्लित अग्रवाल, प्रबुद्ध अग्रवाल और मृदुल अग्रवाल और एक बेटी थीं। पिता के बाहर रहने की वजह से उनके तीनों बेटों व एक बेटी का अधिक समय दादा लाला भीमसेन अग्रवाल के संरक्षण में बीता। प्रफुल्लित अग्रवाल आर्मी स्कूल ग्वालियर से सेवानिवृत हुए हैं। प्रबुद्ध अग्रवाल प्राइवेट फैक्ट्री में जाब करते हैं। बेटी की मृत्यु हो चुकी है।

    वीरों को वंदन विरासत को नमन अभियान सराहनीय

    स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओमप्रकाश शास्त्री के बेटे मृदुल अग्रवाल ने दैनिक जागरण की ओर से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर चलाए जा रहे वीरों को वंदन विरासत को नमन अभियान की सराहना की।

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    उन्होंने कहा कि आजादी की वर्षगांठ से पहले स्कूलों में पोस्टकार्ड लेखन कराकर बलिदानों और शहीदों के आश्रितों के घर भेजने से परिवार के लोग गौरवान्वित होते हैं। इस अभियान से हमारी नई पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन में बलिदानियों और देश की रक्षा करने वाले शहीदों की शहादत के बारे में जानकारी मिलेगी।

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