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    उत्तर प्रदेश में बदले जाएंगे झिझकाने वाले गांवों के नाम, अलीगढ़ मंडल के चारों जिलों से मांगी गई रिपोर्ट

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 06:55 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश में उन गांवों के नाम बदले जाएंगे जिनसे लोग असहज महसूस करते हैं। राजस्व परिषद के निर्देश पर अलीगढ़ मंडल में जाति आधारित नामों की सूची बन र ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. गांवों के जाति या सामाजिक पहचान वाले नाम बदलेंगे।

    2. राजस्व परिषद के निर्देश पर प्रदेशव्यापी अभियान शुरू।

    3. अलीगढ़ मंडल के चार जिलों से रिपोर्ट मांगी गई।

    जागरण संवाददाता, अलीगढ़। जिले में कुछ गांव ऐसे हैं, जिनके नाम को लेकर स्थानीय लोगों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। खासकर स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को सार्वजनिक रूप से अपने गांव का नाम बताने में झिझक महसूस होती है। ऐसे नाम अब बदले जा सकते हैं। राजस्व परिषद के निर्देश पर प्रदेशभर में ऐसे गांवों को चिह्नित कर रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है।

    इस अभियान के दायरे में विशेष रूप से वे गांव शामिल किए जा रहे हैं, जिनके नाम अनुसूचित जाति की विभिन्न उपजातियों के नाम पर रखे गए हैं। शासन स्तर पर ऐसे नामों को बदलकर उपयुक्त नाम देने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

    इसके लिए अलीगढ़ मंडल के अलीगढ़, हाथरस, एटा व कासगंज जिलों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। अलीगढ़ मंडल के अपर आयुक्त प्रथम अखिलेश यादव ने चारों जिलों के डीएम को पत्र भेजकर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

    पत्र में राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव की ओर से भेजे गए निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि अनुसूचित जाति की विभिन्न उपजातियों के नाम पर रखे गए गांवों के नाम परिवर्तन के संबंध में प्रस्ताव तैयार किए जाएं।

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    प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि जहां नाम बदलने का औचित्य पाया जाए, वहां प्रत्येक गांव का अलग-अलग प्रस्ताव तैयार कर स्पष्ट आख्या और संस्तुति के साथ शासन को भेजी जाए।

    नाम के साथ जुटाई जा रही पूरी जानकारी

    प्रशासनिक स्तर पर तैयार की जा रही रिपोर्ट में केवल गांव का वर्तमान नाम ही दर्ज नहीं किया जा रहा, बल्कि उसके नामकरण का आधार भी तलाशा जा रहा है।

    स्थानीय स्तर पर गांव किस नाम से जाना जाता है और किसी वैकल्पिक नाम का सुझाव है या नहीं, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है। इसके लिए संबंधित विभागों व स्थानीय स्तर से तथ्य एकत्र किए जा रहे हैं। रिपोर्ट तैयार होने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजे जाएंगे। अंतिम निर्णय शासन से ही होगा।

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