एक्टर चंद्रचूड़ सिंह का पैतृक संपत्ति विवाद गहराया, भाई ने अलीगढ़ पुलिस को दिए बयान; फर्जी वसीयत का आरोप
अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह और उनके भाई अभिमन्यु सिंह ने अलीगढ़ में पैतृक संपत्ति विवाद को लेकर पुलिस जांच अधिकारी के समक्ष बयान दर्ज कराए हैं।

थाना में बयान दर्ज कराने पहुंचे एक्टर चंद्रचूड़ सिंह व भाई अभिमन्यु सिंह।
HighLights
अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह ने पैतृक संपत्ति विवाद में बयान दर्ज कराए।
चाची सहित सात लोगों पर फर्जी वसीयत का आरोप लगाया गया।
करोड़ों की पैतृक संपत्ति हड़पने के प्रयास का मामला दर्ज।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। ‘चप्पा-चप्पा चरखा चले’ गाने वाली माचिस, क्या कहना और दाग द फायर जैसी हिट फिल्म देने वाले अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह के चरखे के पहिए परिवार की संपत्ति बंटवारे के विवाद से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
अपनी चाची, चचेरे भाई-बहन समेत सात लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज के आधार पर पैतृक हवेली व करोड़ों की संपत्ति हड़पने का मुकदमा पंजीकृत कराने के बाद वह शनिवार को अपने भाई व फिल्म निर्देशक अभिमन्यु सिंह के साथ पुलिस के सामने पहुंचे। दोनों भाइयों को जलालपुर पुलिस चौकी बुलाकर करीब आधे घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान दोनों ने संपत्ति से संबंधित दस्तावेज जांच अधिकारी को सौंपे।
10 एकड़ में फैली है 140 साल पुरानी हवेली
पैतृक हवेली खैर रोड स्थित जलालपुर में है। करीब 140 साल पुरानी यह हवेली लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में फैली है। इससे जुड़ी करीब 56 एकड़ जमीन है। चंद्रचूड़ सिंह के पिता कैप्टन बलदेव सिंह सेना में थे और अवकाश के दिनों में यहां आते थे। उनके छोटे भाई पुण्य प्रताप सिंह और गंगा सिंह हवेली में रहते थे तथा जमीन की देखभाल और खेती करते थे।
कैप्टन बलदेव सिंह के तीनों बेटे चंद्रचूड़ सिंह, अभिमन्यु सिंह और नारायण सिंह फिल्मी क्षेत्र से जुड़े होने के कारण मुंबई में रहते हैं। उनके चाचा पुण्य प्रताप सिंह और गंगा सिंह के परिवार के सदस्य विदेश में रहते थे। कैप्टन बलदेव सिंह और पुण्य प्रताप सिंह का निधन कई पहले हो चुका है।
गंगा सिंह का अक्टूबर 2025 में निधन हुआ था। तब चंद्रचूड़ सिंह परिवार के साथ पैतृक हवेली पहुंचे थे। आरोप है कि गंगा सिंह की पत्नी गायत्री देवी ने उन्हें हवेली में प्रवेश करने से रोक दिया था। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में चंद्रचूड़ सिंह को हवेली में प्रवेश कराया गया। इसी घटनाक्रम के बाद पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद खुलकर सामने आया।
यह लगाए थे आरोप
चंद्रचूड़ सिंह और अभिमन्यु सिंह का आरोप है कि उनके दादा हरेंद्र पाल सिंह की गंभीर बीमारी का फायदा उनके चाचा गंगा सिंह ने उठाया।
आरोप है कि हरेंद्र पाल सिंह के निधन से एक दिन पहले 30 जनवरी 1997 को फर्जी वसीयत तैयार कराकर उनके नाबालिग पुत्र जय सिंह के नाम संपत्ति करा ली गई। 1995 की वसीयत पंजीकृत है, जिसमें पैतृक संपत्ति तीनों पुत्रों में बराबर बांटी गई है। उनका आरोप है कि करीब 150 करोड़ रुपये की पैतृक संपत्ति पहले ही बेची जा चुकी है।
इस मामले को लेकर वह 2025 में नवंबर और दिसंबर में एसएसपी और डीएम से मिले थे। गायत्री देवी भी अपने पुत्र के साथ अधिकारियों से मिली थीं। उन्होंने चंद्रचूड़ सिंह और अभिमन्यु सिंह के संपत्ति पर दावे को गलत बताया था।
दूसरे पक्ष से जल्द संपर्क करेगी पुलिस
अब 14 अगस्त को अभिमन्यु सिंह ने अपनी चाची गायत्री देवी, चचेरे भाई जय सिंह, बहन अंजनी सिंह, वसीयत के गवाह संदीप कुमार सिंह व शिव कुमार, राबिन एकसन तथा अधिवक्ता अजीत सिंह तोमर के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज के आधार पर संपत्ति हड़पने का आरोप लगाते हुए रोरावर थाने में मुकदमा पंजीकृत कराया।
इसकी जांच कर रहे उप निरीक्षक सचिन कुमार ने बताया कि एक पक्ष के चंद्रचूड़ सिंह व अभिमन्यु सिंह से मुकदमे के संबंध में पूछताछ की जा रही है। अब दूसरे पक्ष से संपर्क किया जाएगा।
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