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    गर्मी में पारा बढ़ते ही ‘खूंखार’ हो रहे कुत्ते-बंदर, सड़क पर चलते लोगों को बना रहे है शिकार; बरतें सावधानी

    By Jitendra Pandey Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Sat, 18 Apr 2026 06:41 PM (IST)

    गर्मी बढ़ने से अलीगढ़ में कुत्तों और बंदरों का आक्रामक व्यवहार बढ़ा है, जिससे काटने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 300 से अधि ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

    सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

    HighLights

    1. जिला अस्पताल में एंटी-रेबीज टीके 20% अधिक लगे।

    2. लोगों को सतर्क रहने और जानवरों को न छेड़ने की सलाह।

    जागरण संवाददाता, अलीगढ़। अगर आप शहर की गलियों या सड़कों से गुजर रहे हैं तो सतर्क हो जाइए। 40 डिग्री से ऊपर पहुंच चुके तापमान के कारण पड़ रही भीषण गर्मी में अब कुत्तों और बंदरों का आक्रामक व्यवहार तेजी से बढ़ गया है। हालात यह हैं कि कब कौन सा आवारा कुत्ता या बंदर हमला कर दे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है।

    शहर से लेकर देहात तक इनका आतंक लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुका है। जिला अस्पताल मलखान सिंह में शनिवार को एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने वाले मरीजों की संख्या 300 के पार पहुंच गई। इनमें 147 नए मरीज शामिल रहे, जबकि बीते पांच दिनों में 1300 मरीजों में 725 नए मरीज कुत्ता व बंदर के काटने के पहुंचे।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे जानवरों का व्यवहार भी आक्रामक होता जा रहा है। शहर के गली-मुहल्लों में आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं। राहगीरों पर भौंकने के साथ अब हमला करना भी आम हो गया है।

    कई बार तो कुत्ते दोपहिया वाहन चालकों के पीछे दौड़ पड़ते हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है। रात के समय कई इलाकों में कुत्तों के झुंड सड़कों पर डेरा डाल लेते हैं। इनसे बचने के प्रयास में कई वाहन चालक गिरकर घायल हो चुके हैं। दूसरी ओर बंदरों का आतंक भी कम नहीं है।

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    छतों पर कपड़े सुखाने गईं महिलाएं और बच्चे इनके निशाने पर आ जाते हैं। कई मोहल्लों में बंदर अचानक हमला कर लोगों को घायल कर रहे हैं।

    जिला अस्पताल के सीएमएस डा. जगवीर सिंह वर्मा ने बताया कि मौसम में बदलाव का असर पशु-पक्षियों के व्यवहार पर पड़ता है। गर्मी के मौसम में कुत्ते अधिक आक्रामक हो जाते हैं, जिससे डाग बाइट के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।

     

    कुत्ता काटे तो क्या करें

    - घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।
    - एंटीसेप्टिक या अल्कोहल लगाएं।
    - बिना देरी किए अस्पताल जाकर एंटी रेवीज वैक्सीन लगवाएं।

    क्या न करें

    - घाव को ढकें नहीं।
    - हल्दी, चूना, मिर्च, बाम या जड़ी-बूटी न लगाएं।
    - घाव को जलाएं या दागें नहीं।
    - झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें।

     

    जिला अस्पताल में हर रोज तकरीबन 300 एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। फरवरी, मार्च की तुलना में ये 20 प्रतिशत ज्यादा है। चूंकि, कुत्तों के सिर्फ पंजों में ही पसीना निकलने की ग्रंथि होती है। पूरे शरीर में बाल होने की वजह से इनका पसीना निकल नहीं पाता है। इसलिए इन्हें ज्यादा गर्मी लगती है। इस वजह से अप्रैल-मई-जून में खूंखार हो जाते हैं और हमला करने लगते हैं। लोगों को चाहिए कि इस समय कुत्तों को न छेड़ें।
    डा. नरेंद्र कुमार चौधरी, एआरवी परामर्शदाता