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    शुरू होने जा रहे हैं मांगलिक कार्य, अक्षय तृतीया से गूंजने लगेंगी शहनाई; साहलग से बाजार को बड़ी उम्मीद

    By Krishna Chandra Dargarh Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Mon, 06 Apr 2026 01:53 PM (IST)

    खरमास 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ समाप्त हो जाएगा। इसके बाद विवाह, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य फिर से शुरू होंगे। वैदिक ज्य ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर।

    सांकेतिक तस्वीर।

    जागरण संवाददाता, अलीगढ़। वैदिक पंचांग के अनुसार मांगलिक कार्यों को संपन्न करने के लिए ग्रह नक्षत्रों की दशा का विशेष महत्व होता है। इनके उदय और अस्त होने से शुभ कार्य प्रभावित हो जाते हैं। खरमास भी ग्रहों की युति से बना ऐसा ही समय काल है, जिसमें मांगलिक कार्य प्रतिबंधित हो जाते हैं।

    15 मार्च से सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास शुरू हुए थे जो कि 14 अप्रैल मंगलवार को सुबह 9.38 बजे सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ खरमास समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही विवाह, गृह प्रवेश, लग्न, शुभ समारोह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, व्यवसाय आरंभ के साथ नए कार्यों का पुनः शुभारंभ हो जाएगा।

    वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी पूर्णानंदपुरी ने बताया कि ग्रहों के राजा सूर्य अलग अलग राशियों में संचरण करते हैं किसी राशि में सूर्य का प्रवेश संक्रांति नाम से जाना जाता है। सूर्य के धनु अथवा मीन राशि में आने से खरमास नाम का एक विशेष तपशील काल बनता है, जिसे देव कार्यों के लिए तो श्रेष्ठ माना गया है।

    परंतु सांसारिक शुभ कार्यों हेतु निषेध माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, खरमास के कालखंड में सूर्य की तेजस्वी ऊर्जा कुछ मंद मानी जाती है। सूर्य को नवग्रहों का अधिपति और आत्मबल का प्रमुख कारक माना गया है, इसलिए उनकी पूर्ण कृपा के अभाव में किए गए मांगलिक कार्य अपेक्षित सफलता प्रदान नहीं कर पाते।

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    इस अवधि में देवगुरु बृहस्पति भी अपनी संपूर्ण शुभ शक्ति का प्रभाव नहीं दिखा पाते, जिसके कारण शुभ आयोजनों का फल अधूरा या कमजोर रह सकता है। इस कारण से खरमास में कोई भी शुभ कार्य नहीं जाते।

    ये हैं शुभ मुहूर्त

    • अप्रैल-20, 21, 25, 26, 27, 29, 30
    • मई- 5, 6, 7, 8, 9, 10, 14

     

    अक्षय तृतीया पर बिना पंचाग देखे अबूझ मुहूर्त

    वैशाख शुक्ल की तृतीया को अक्षय तृतीया है। इस बार तृतीया तिथि का आरंभ 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगा और समापन 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार। अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा।20 अप्रैल को भी अक्षय तृतीया मना सकते हैं। इस दिन बिना पंचाग देखें शादियां की जा सकती हैं।