चूहों का दुश्मन है सांप...बारिश में निकले बिलों से बाहर, सभी नहीं होते जहरीले; अगर काट जाए तो कैसे करें बचाव
सांप पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और चूहों की आबादी नियंत्रित करते हैं। मानसून में सांप बिलों से बाहर आते हैं; काटने पर तुरंत अस्प ...और पढ़ें

आगरा में एक घर से सांप को रेस्क्यू करते वाइल्ड लाइफ एसओएस के सदस्य।
राज प्रताप, आगरा। सांप प्रकृति के सबसे महत्वपूर्ण जीवों में से एक हैं। ये पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। खेतों, जंगलों और घास के मैदानों में रहने वाले सांप चूहों और अन्य छोटे जीवों की संख्या नियंत्रित करते हैं। यदि सांप न हों तो चूहों की आबादी तेजी से बढ़ सकती है, जिससे फसलों को भारी नुकसान होने के साथ कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाएगा।
सांप खाद्य शृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे छोटे जीवों का शिकार करते हैं और स्वयं बाज, उल्लू, नेवला न अन्य वन्यजीवों का भोजन भी बनते हैं। इस तरह वे जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में योगदान देते हैं। कई सांपों के विष का उपयोग आधुनिक चिकित्सा में दवाएं बनाने और नई औषधियों पर शोध के लिए किया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सांप बिना वजह इंसानों पर हमला नहीं करते। वे केवल खतरा महसूस होने पर ही बचाव में प्रतिक्रिया देते हैं। इसलिए उन्हें मारने के बजाय सुरक्षित स्थान पर छोड़ना और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण करना जरूरी है।
वाइल्ड लाइफ एसओएस के निदेशक बैजूराज एम.वी का कहना है कि हमारा एनजीओ कई वर्षों से सापों की रक्षा कर रहा है। ताज मोहम्मद, हाताम, सुनील नाथ, कर्मवीर नाथ, मोरनाथ, उत्तम और उदयनाथ ने दिन रात मेहनत और अपनी जान खतरे में डालकर हजारों की संख्या में सांपों को बचाया है।
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आगरा में कोबरा, किंग कोबरा, करैत, अजगर, रैट स्नेक, ट्रिंकेट स्नेक, रेड सैंड बोआ, कामन रेड सैंड बोआ, रायल स्नेक, लाइकोडान सहित 17 से 18 प्रजाति पाई जाती हैं। सबसे अधिक जहरीले सांप कोबरा, किंग कोबरा व करैत होता है। बताया कि मानसून में सबसे अधिक सांप के काटने की बात चर्चा में रहती है, क्योंकि बिलों में पानी भरना और उमस के कारण यह बिलों से बाहर आ जाते हैं।
घर में यदि सांप निकले तो घबराने की जरूरत नहीं, वह बिना छेड़े किसी को नहीं काटते हैं। सांप किसी को भी काट ले तो सबसे पहले उसकी फोटो अवश्य रूप से खींच लें, क्योंकि डाक्टर को इलाज करने में आसानी हो जाती है।
उदाहरण के तौर पर यदि सांप पैर के अंगूठे में काट ले, तो उससे ऊपर दो से तीन जगह कपड़े से बांध (कसकर न बांधें) दें। झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़कर तुरंत जिला अस्पताल में मरीज को भर्ती कराएं।
मरीज को हौसला दें और सोने न दें
सिकंदरा निवासी जोगा सिंह का कहना है कि वह लगभग 40 साल से सांपों का रेस्क्यू कर रहे हैं। अबतक लगभग पांच हजार सापों का बचाया होगा। आगे भी नए लड़कों व लड़कियों को ट्रैनिंग दे रहे हैं। ताकि नई पीढ़ी के बच्चे भी सांपों को बचाने अहम भूमिका निभाएं।
सांप के काटने पर घाव चीरा बिल्कुल भी नहीं लगाएं। मरीज को हौसला दें, सोने न दें और खुली हवा में रखें। अगर के इलाज में देशी घी में पिसी काली मिर्च मिलाकर मरीज को पिला दें, वह जहर को काटने में सक्षम होता है।
भोजन की तलाश में घरों में घुस जाते हैं सांप
कोबरा एनजीओ के संचालक मधुनगर निवासी अंशुल दीप साह का कहना है कि वह लगभग 10 साल से सापों को बचा रहे हैं। जंगल को काटकर लोगों को बसाया जा रहा है। मानसून में पानी बचने और भोजन की तलाश में सांप लोगों के घरों में घुस जाते हैं।
ऐसी स्थिति में लोगों को सतर्क रह कर रेस्क्यू टीम को फोन करना चाहिए और सांपों की जान बचाने में मदद करनी चाहिए। सांपों में न्यूरोटाक्सिन और ह्मयो टाक्सिन जहर पाया जाता है।
नोट: घर, होटल, रेस्टोरेंट, कार्यालय में यदि सांप दिखे तो टोल फ्री नंबर 112 और वाइल्ड लाइफ एसओएस के नंबर 9917109666 पर काॅल कर रेस्क्यू टीम से संपर्क करें।