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सरकारी स्कूलों में कवायद, करंट अफेयर्स सुधारने को पढ़ाए जाएंगे अखबार; आगरा में होंगी प्रतियोगिताएं

By Sumit Kumar Dwivedi Edited By: Prateek Gupta
Published: Tue, 18 Aug 2026 07:04 PM (IST)

आगरा के परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की पढ़ने की आदत और करंट अफेयर्स की समझ बढ़ाने के लिए अब रोजाना ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

जागरण संवाददाता, आगरा। परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की पढ़ने की आदत और करंट अफेयर्स की समझ को बढ़ावा देने के लिए जिला बेसिक शिक्षा विभाग ने अच्छा निर्णय लिया है। अब विद्यालयों में रोजाना अखबार पढ़ना अनिवार्य होगा और हर 15 दिन में प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा। यह व्यवस्था विशेष रूप से परिषदीय स्कूलों में लागू की जाएगी।

वर्तमान में बच्चे अधिकतर समय मोबाइल और इंटरनेट मीडिया पर बिताते हैं, जिससे लंबे और गंभीर पाठ पढ़ने की आदत में कमी आ रही है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

रोजाना अखबार पढ़ने से छात्रों में नियमित पढ़ने की आदत विकसित होगी, जिससे उनकी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में वृद्धि होगी। करंट अफेयर्स की समझ मजबूत होगी और संवाद कौशल में निखार आएगा। कक्षा में समाचारों पर चर्चा करने से बच्चे आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रख सकेंगे। प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित किया जाएगा, जिससे उनके कौशल में और निखार आएगा

स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय खबरों से बच्चे अपने आसपास की घटनाओं से जुड़ेंगे, जिससे सामाजिक जिम्मेदारी और नागरिकता की समझ विकसित होगी। नियमित पढ़ाई से हिंदी की शब्दावली और सामान्य ज्ञान में सुधार होगा, जो परीक्षाओं में निबंध, पत्र लेखन और मौखिक परीक्षा में सहायक होगा। इससे बच्चे तथ्यों पर आधारित सोच विकसित करेंगे।

कक्षा में चर्चा और बहस की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, जिससे बच्चे केवल रटने वाले नहीं, बल्कि सोचने-समझने वाले बनेंगे। जिले में 2491 परिषदीय विद्यालय हैं, जहां लगभग 2.18 लाख छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि कक्षा एक से आठ तक के बच्चे इसके दायरे में रहेंगे

छोटी कक्षाओं के लिए आसान भाषा वाले बच्चों के अखबार या बुलेटिन का उपयोग किया जाएगा। प्रतियोगिता को रचनात्मक बनाने के लिए दीवार पत्रिका, छोटे बुलेटिन और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग जैसे कार्यों को शामिल किया जाएगा।

जहां अखबार पहुंचने में देरी हो, वहां डिजिटल स्क्रीन पर प्रमुख खबरें दिखाई जा सकती हैं, लेकिन प्रिंट अखबार की आदत बनाए रखना जरूरी है। परीक्षा के दिनों में इसे हल्का रखा जाएगा, जिससे बच्चों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।