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    आगरा किला-फतेहपुर सीकरी के 5 KM दायरे में पेड़ काटने पर रोक, सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 09:25 AM (IST)

    यह कदम इन विश्व धरोहर स्थलों की पर्यावरण सुरक्षा और संरक्षण के लिए उठाया गया है, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। ...और पढ़ें

    फाइल फोटो।

    फाइल फोटो।

    HighLights

    1. आगरा किला, फतेहपुर सीकरी 5 किमी में पेड़ काटने पर रोक।

    2. सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट को दी सिफारिश।

    3. पर्यावरण सुरक्षा, विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण हेतु निर्णय।

    जागरण संवाददाता, आगरा। ताजमहल के समान अब आगरा किला और फतेहपुर सीकरी की पांच किमी की परिधि में पेड़ नहीं काटे जा सकेंगे। सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में इसकी सिफारिश की है। यहां पेड़ काटने को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। इससे दोनों स्मारकों के आसपास विकास से जुड़ी परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

    सीईसी ने सुप्रीम कोर्ट के एक मई, 2025 के आदेश पर यह रिपोर्ट सौंपी है। सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल की पांच किमी की परिधि में पेड़ों को काटने पर रोक लगाते हुए उसके बाहर ताज ट्रेपेजियम जोन में पेड़ों को काटने के लिए सीईसी द्वारा तैयार स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को स्वीकार किया था। 

    सुप्रीम कोर्ट में सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी ने दाखिल की रिपोर्ट

    कोर्ट ने सीईसी को ताज ट्रेपेजियम जोन के भीतर मौजूद अन्य दो विश्व धरोहरों आगरा किला और फतेहपुर सीकरी की सुरक्षा के लिए पेड़ काटने पर लगाई जाने वाली पाबंदियों के बारे में एक नई रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया था। कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सीईसी ने वन विभाग के अधिकारियों समेत अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत की।

    ताजमहल के लिए पिछले वर्ष बनाई थी एसओपी

    आगरा किला और फतेहपुर सीकरी का दौरा किया। इसमें यह बात सामने आई कि टीटीजेड में पर्यावरण सुरक्षा का मकसद सिर्फ ताजमहल के बचाव तक ही सीमित नहीं है। टीटीजेड को पर्यावरण की सुरक्षा और पूरे इलाके की सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए बनाया गया था, जिसमें तीन विश्व धरोहर ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी शामिल हैं।

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    आगरा किला और फतेहपुर सीकरी यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स हैं जिनका ऐतिहासिक, आर्किटेक्चरल और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है। ताजमहल की तरह, इन स्मारकों को भी लंबे समय तक बचाव और सुरक्षा के लिए एक स्वस्थ और स्थिर माहौल की जरूरत है।

    पेड़ और हरियाली ऐसे माहौल को बनाए रखने में अहम भूमिका

    इन स्मारकों में और उनके आस-पास पेड़ और हरियाली ऐसे माहौल को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ये स्थानीय माइक्रोक्लाइमेट को रेग्युलेट करते हैं। धूल और प्रदूषक तत्वों को रोककर हवा की गुणवत्ता में सुधार करते हैं। आस-पास के तापमान और शोर के लेवल को कम करते हैं। मिट्टी और पानी को बचाते हैं।

    इन स्मारकों के आस-पास पेड़ों की अंधाधुंध कटाई

    बायोडायवर्सिटी को सपोर्ट करते हैं और स्मारकों के आस-पास के प्राकृतिक नजारों को बचाते हैं। हरियाली इन स्मारकों की विजुअल सेटिंग और हेरिटेज कैरेक्टर को भी बेहतर बनाती है, साथ ही बढ़ते शहरीकरण के बुरे असर को कम करती है। यह देखा गया कि इन स्मारकों के आस-पास पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से आस-पास के माहौल पर बुरा असर पड़ सकता है।

    पेड़ों के खत्म होने से धूल का स्तर बढ़ सकता है, आस-पास का तापमान बढ़ सकता है, हवा की क्वालिटी खराब हो सकती है, मिट्टी का कटाव हो सकता है, और ऐतिहासिक नजारों में गड़बड़ी हो सकती है, जिससे इन विश्व धरोहरों के लंबे समय तक बचाव और सुरक्षा के लिए जरूरी पर्यावरण की स्थितियों पर बुरा असर पड़ सकता है।

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    सुप्रीम कोर्ट ने सिफारिश में जोड़ीं शर्तें

    1. अनुमति देते समय प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी (डीएफओ) और सीईसी उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 के प्रविधानों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे।
    2. जब तक पेड़ काटने की कोई गंभीर और तत्काल आवश्यकता न हो, अनुमति देते समय डीएफओ और सीईसी यह शर्त लगाएंगे कि जब तक अनिवार्य पौधारोपण की शर्त सहित अन्य सभी शर्तों का पालन नहीं किया जाता, तब तक वास्तव में पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
    3. पौधारोपण की शर्तों का पालन करने के बाद ही पेड़ काटने/छांटने की वास्तविक अनुमति दी जाएगी।
    4. अपवाद तभी किया जा सकता है जब पेड़ काटने की बहुत गंभीर और तुरंत जरूरत हो, यानी अगर पेड़ तुरंत नहीं काटे गए, तो
    5. लोगों की जान जाने का असली खतरा हो।

    पेड़ों की कटाई पर रोक लगाना जरूरी

    सीईसी ने रिपोर्ट में माना है कि पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, पब्लिक सेफ्टी, जरूरी सिविक सर्विसेज या दूसरे जरूरी पब्लिक मकसदों के लिए पेड़ों को हटाना जरूरी हो सकता है। इसलिए, उद्देश्य पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं होना चाहिए, बल्कि यह पक्का करना चाहिए कि ऐसी कटाई एक ट्रांसपेरेंट, साइंटिफिक और कानूनी तौर पर सही तरीके से रेगुलेट हो, जो डवलपमेंट की जरूरतों और पर्यावरण की सुरक्षा और इन विश्व धरोहरों को बचाने की जरूरत के बीच संतुलन बनाए।

    सीईसी ने ताजमहल से पांच किलोमीटर की हवाई दूरी से आगे के इलाकों के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर जो सुरक्षा उपाय और शर्तें मंजूर की हैं, उन्हें आगरा किला और फतेहपुर सीकरी की सुरक्षा पर भी लागू करने की रिपोर्ट दी है।