27 साल बाद आगरा कोर्ट ने चरस आरोपी को किया बरी, गवाही के लिए नहीं पहुंची पुलिस
आगरा की अदालत ने 27 साल पुराने चरस मामले में आरोपी मुन्ना को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। पुलिसकर्मी 27 साल तक गवाही देने अदालत नहीं पहुंचे, जिस ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
आगरा कोर्ट ने 27 साल बाद आरोपी को बरी किया।
पुलिसकर्मी चरस मामले में गवाही देने अदालत नहीं पहुंचे।
सबूतों के अभाव में मुन्ना को दोषमुक्त किया गया।
जागरण संवाददाता, आगरा। पुलिस ने 27 साल पहले चरस की 19 पुड़ियां बरामद कर अपनी पीठ थपथपाई। थाना पुलिस के साथ एसओजी टीम भी लगाई गई थी। आरोपित पकड़ा गया तो कहा गया कि वह चरस की खरीद और बिक्री करता है। जब अदालत में इसकी पैरवी की वारी आई तो सभी भूल गए। अदालत 27 साल तक इंतजार करती रही, लेकिन गवाही को एक भी पुलिसकर्मी भी नहीं पहुंचा।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सप्तम अनुज कुमार सिंह की अदालत ने साक्ष्य के अभाव का हवाला देकर 27 साल बाद आरोपित मुन्ना को बरी करने का आदेश जारी किया है।
सदर पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने शराब और चरस बेचते पकड़ा था आरोपित
23 अगस्त 1999 को सदर थाने में तैनात उपनिरीक्षक आरके सिसौदिया, उपनिरीक्षक पीएन राय, पुलिस कर्मी रमाशंकर, जगदीश सिंह के साथ इलाके में गश्त कर रहे थे, तभी राजपुर चुंगी के पास भांग दुकान के बाहर चरस एवं शराब बेचने की सूचना मिली।
थाना सदर पुलिस ने एसओजी के उपनिरीक्षक संजीव कटियार, पुलिस कर्मी रामपाल, प्रदीप पचौरी, मानपाल सिंह, वेद प्रकाश को साथ लेकर मौके पर दबिश दी, जहां से आरोपित मुन्ना को 19 पुड़िया चरस के साथ हिरासत में ले लिया।
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अपने गुडवर्क की भी नहीं कर सके अदालत में पैरवी, कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं पहुंचे
ट्रायल में पुलिस और एसओजी के करीब एक दर्जन गवाहों को गवाही देनी थी। कोर्ट के कई बार आदेश पारित करने के बाद कोई भी गवाही देने अदालत नही पहुंचा। इस बीच अदालत ने 10 दिसंबर 25 को अभियोजन का साक्ष्य का अवसर समाप्त कर दिया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सप्तम अनुज कुमार सिंह ने आरोपी के अधिवक्ता अरुण तेहरिया के तर्क एवं साक्ष्य के अभाव में आरोपित को बरी करने के आदेश दिए हैं।