Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    आगरा नगर निगम की शर्मनाक करतूत, सफाई की शिकायत करने वाले नागरिक को बताया 'मानसिक विक्षिप्त'

    Updated: Tue, 16 Jun 2026 12:15 PM (GMT+05:30)

    भीम नगर निवासी विशेष राठौर ने जलभराव और गंदगी की शिकायत की, जिस पर नगर निगम अधिकारियों ने उन्हें 'मानसिक विक्षिप्त' घोषित कर शिकायत बंद कर दी। इस अपमा ...और पढ़ें

    जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत करने वाले विशेष राठौर, इसी जलभराव और गंदगी को लेकर विशेष राठौर द्वारा जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायत जागरण

    जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत करने वाले विशेष राठौर, इसी जलभराव और गंदगी को लेकर विशेष राठौर द्वारा जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायत जागरण

    HighLights

    1. विशेष राठौर ने जनसुनवाई पोर्टल पर गंदगी की शिकायत की

    2. नगर निगम ने शिकायतकर्ता को 'मानसिक विक्षिप्त' घोषित किया।

    3. मानवाधिकार आयोग ने डीएम को जांच के आदेश दिए।

    अली अब्बास, आगरा। क्षेत्र में फैली गंंदगी और बदहाली की शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर कराने वाले एक जागरूक नागरिक को नगर निगम के अधिकारियों ने कागजों में 'मानसिक विक्षिप्त' घोषित कर दिया। यही नहीं, अधिकारियों ने इसी शर्मनाक टिप्पणी के साथ शिकायत को पाेर्टल पर निस्तारित भी कर दिया।

    शिकायतकर्ता को इसका पता चला तो उसने अपने सम्मान की लड़ाई लड़ते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग ने मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए डीएम को पूरे प्रकरण की जांच करा चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

    विशेष राठाैर ने क्षेत्र में जलभराव और गंदगी की जनसुनवाई पोर्टल पर की थी शिकायत

    यह अजब-गजब और संवेदनहीन मामला जगदीशपुरा थाना क्षेत्र के भीम नगर निवासी विशेष राठौर का है। कैटरिंग और हलवाई का काम करने वाले दसवीं पास विशेष राठौर क्षेत्र की समस्याओं को अक्सर उठाते रहते हैं।

    विशेष ने बताया कि 31 मार्च 2035 को उन्होंने इलाके में व्याप्त गंदगी, नालियाें के चोक होने और सड़क पर जलभराव से सफाई व्यवस्था चरमराने की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई थी। उन्हें उम्मीद थी कि शासन के निर्देशों के अनुसार अधिकारी मौके पर आकर स्थिति का जायजा लेने के बाद सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कराएंगे। मगर, नगर निगम के अधिकारियों ने समस्या का समाधान करने की जगह उनके मानसिक स्वास्थ्य पर ही सवाल खड़े कर दिए।

    खबरें और भी

    राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत

    नगर निगम के तत्कालीन जांच अधिकारी राघवेंद्र यादव (जो कि सेनेटरी एवं फूड इंस्पेक्टर पद पर तैनात थे)नौ अप्रैल को मौके पर पहुंचे। उहोंने क्षेत्र में फैली गंदगी को साफ कराने की जगह अपनी आख्या तैयार कर दी।

    इंस्पेक्टर राघवेंद्र सिंह ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि शिकायकर्ता 'कुछ मानसिक विक्षिप्त है' और इसी आधार पर शिकायत को निस्तारण के योग्य मान लिया। हद तो तब हो गई जब उच्च अधिकारी ने भी आंख बंद करके जांच इस पर भरोसा कर लिया। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव वर्मा ने सेनेटरी इंस्पेक्टर की इस अपमानजनक आख्या पर अपनी मुहर लगाते हुए पोर्टल पर शिकायत का अंतिम रूप से निस्तारण दिखा दिया।

    डीएम को जांच करा चार सप्ताह में जवाब देने के आदेश

    विशेष राठौर ने अपनी शिकायत का स्टेटस ऑनलाइन चेक किया तो अधिकारियों की आख्या देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। एक स्वस्थ और जागरूक नागरिक को सरकारी रिकॉर्ड में मानसिक रूप से बीमार बता दिया गया था।

    नके माैलिक अधिकारों का हनन किया

    विशेष बताते हैं कि इस प्रशासनिक क्रूरता और अपमान से आहत होकर उन्होंने 20 जुलाई 2025 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की। आयोग को बताया कि किस तरह अधिकारियों ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए उनके माैलिक अधिकारों का हनन किया।

    मानवाधिकार आयोग ने इसे मानवाधिकारों और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के उल्लंघन का गंभीर मानते हुए 12 जून को डीएम को नोटिस जारी करके पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने कें निर्देश दिए हैं। जिसकी रिपोर्ट अगले चार सप्ताह में आयोग को समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है।

    यह भी पढ़ें- बहन की हत्या करने वाले शूटर ओपी लाला के भतीजे ललित चौधरी को फांसी की सजा, आगरा कोर्ट का फैसला

    यह भी पढ़ें- बुलडोजर से हटाई आगरा MG रोड पर बनी मजार, कॉलेज के सामने बनी मस्जिद परिसर में शिफ्ट