बाह की बेटी ने कश्मीर में संभाली भारतीय सेना की कमान, अमरनाथ यात्रा और सामरिक सड़कों की मिली जिम्मेदारी
कर्नल शिखा भदौरिया ने भारतीय सेना में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के 32 बार्डर रोड्स टास्क फोर्स की कमान संभाली है। वह उत्तर कश्मीर में सामरिक सड़कों और अ ...और पढ़ें

कश्मीर में 32 बीआरटीएफ कमांडर शिखा भदौरिया।
HighLights
कर्नल शिखा ने कश्मीर में 32 बीआरटीएफ की कमान संभाली।
वह स्वर्ण पदक विजेता और राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज हैं।
सत्येंद्र दुबे, बाह (आगरा)। बाह तहसील के ग्राम पुरा बाघराज (कैंजरा) की बेटी कर्नल शिखा भदौरिया ने भारतीय सेना में अपनी मेहनत, प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता से क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। कर्नल शिखा ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के प्रोजेक्ट बीकान के अंतर्गत 32 बार्डर रोड्स टास्क फोर्स (32 बीआरटीएफ) की कमान संभाली है।
वह उत्तर कश्मीर में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सड़क संपर्क को बनाए रखने और सेना के अभियानों को आवश्यक सहयोग देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही हैं। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़क मार्गों को सुचारू रखना बीआरओ की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
कर्नल शिखा के नेतृत्व में 32 बीआरटीएफ सामरिक महत्व वाले मार्गों के रखरखाव और संचालन से जुड़े कार्य कर रही है। इसके साथ ही पवित्र अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षित एवं सुचारु यातायात व्यवस्था बनाए रखने में भी उनकी अहम भूमिका है।
स्वर्ण पदक से कर्नल की कमान तक
कर्नल शिखा भदौरिया का सफर उपलब्धियों से भरा रहा है। वह अकादमी की स्वर्ण पदक विजेता रही हैं। राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज के रूप में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। वर्ष 2018 में उन्हें वूमन ऑफिसर ऑफ द ईयर सम्मान मिला था। उन्होंने आईआईटी रुड़की से एमटेक की डिग्री हासिल की है। सैन्य सेवा में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए वह कर्नल के प्रतिष्ठित पद तक पहुंची हैं।
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सेना सेवा परिवार की परंपरा
कर्नल शिखा भदौरिया विजय प्रताप सिंह भदौरिया की सुपुत्री हैं। उनके परिवार में सेना सेवा की गौरवशाली परंपरा रही है। उनके चाचा कर्नल गजेंद्र सिंह भदौरिया और पति कर्नल ऋषभ सिंह भदौरिया भी भारतीय सेना में कार्यरत हैं। परिवार की इसी सैन्य पृष्ठभूमि और संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए कर्नल शिखा ने देशसेवा में अपनी अलग पहचान बनाई है।