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    आगरा में डराने लगी यमुना, बल्केश्वर घाट डूबा; खतरे के निशान को छूने की आशंका के बीच प्रशासन अलर्ट

    By Amit Dixit Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Mon, 10 Aug 2026 10:10 PM (IST)

    यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से आगरा में बल्केश्वर घाट डूब गया है, और मंगलवार तक खतरे के निशान तक पहुंचने की आशंका है। प्रशासन ने 23 गांवों को अलर्ट किया ...और पढ़ें

    आगरा में सोमवार शाम को बलकेश्वर घाट की सीढ़ियों तक पहुंचा यमुना का पानी।

    आगरा में सोमवार शाम को बलकेश्वर घाट की सीढ़ियों तक पहुंचा यमुना का पानी।

    जागरण संवाददाता, आगरा। यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने के चलते सोमवार दोपहर बल्केश्वर घाट डूब गया। घाट के रास्ते को बंद करते हुए बैरिकेडिंग कर दी गई है। पुलिस पहरा दे रही है। जलस्तर 149.62 (152 मीटर खतरे का निशान) मीटर पर पहुंच गया। गोकुल बैराज से दोपहर बाद साढ़े 43 हजार क्यूसेक पानी छोड़ जा रहा है। ऐसे में मंगलवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच सकता है।

    जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने 23 गांवों में मुनादी कराई और नदी की तरफ न जाने की अपील की जा रही है। नई दिल्ली, हरियाणा में लगातार हो रही बरसात के चलते यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। आठ अगस्त को हथिनी कुंड बैराज से 43 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। सोमवार को हथिनी कुंड से 35 हजार और गोकुल बैराज से साढ़े 43 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया।

    इसके चलते जलस्तर 149.61 मीटर पर पहुंच गया। बल्केश्वर घाट डूब गया। घाट के रास्ते को पुलिस ने बंद करते हुए बैरिकेडिंग कर दी है। मनोहरपुर, पोइया घाट के आसपास के खेतों में तेजी से पानी पहुंच रहा है। जलस्तर बढ़ने के कारण तहसील सदर के 15 और फतेहाबाद तहसील के आठ गांवों के लोगों को सतर्क कर दिया गया है। सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है।

    मंगलवार को जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच सकता है। एडीएम वित्त एवं राजस्व संदीप कुमार ने बताया कि यमुना नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। इसपर लगातार नजर रखी जा रही है। मेट्रो के पांच पिलरों का निर्माण और इंटकवेल का निर्माण बंद हो गया है।

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    बैक मार सकते हैं नाले

    यमुना नदी का लो फ्लड लेवल 152 मीटर है। अगर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाता है तो इससे संकट खड़ा हो जाएगा। मंटोला, जीवनी मंडी, हाथी घाट, बल्केश्वर, दयालबाग सहित अन्य नाले बैक मारना शुरू कर देंगे

    इससे शहर के नालों के पानी की निकासी ठीक से नहीं हो सकेगी। वहीं यमुना आरती स्थल के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) है। जलस्तर बढ़ने से एसटीपी का संचालन बंद हो सकता है।