पैरों में छाले...दिल में महादेव, आगरा नगर परिक्रमा में दिखा रात से लेकर सुबह तक आस्था का महाकुंभ
आगरा में शिवभक्तों ने 44 किलोमीटर की पारंपरिक नगर परिक्रमा पूरी की, जिसमें पैरों में छाले और कठिन मार्ग के बावजूद अटूट आस्था दिखी। रातभर चले इस महाकुं ...और पढ़ें

आगरा में रविवार देर रात नगर परिक्रमा करते श्रद्धालु।
जागरण संवाददाता, आगरा। रात के सन्नाटे में भी रविवार रात्रि आगरा की सड़कें जाग रही थीं। जहां तक नजर गई, आस्था का भगवा ज्वार नजर आया। किसी के हाथ में गंगाजल था, तो किसी के पैरों में घुंघरू और कमर में बंधी घंटियों की छन-छन... और हर ओर एक ही स्वर हर-हर महादेव... बम-बम भोले के जयघोष। नंगे पैर करीब 44 किलोमीटर की नगर परिक्रमा पर निकले शिवभक्तों के पैरों में छाले थे।
मार्ग में गिट्टियां और गड्ढे थे, लेकिन चेहरे पर थकान से अधिक भक्ति का तेज था। रविवार शाम करीब पांच बजे शुरू हुई पारंपरिक नगर परिक्रमा रातभर चलती रही और सोमवार सुबह तक परिक्रमार्थी शहर की सीमाओं पर स्थित चारों प्राचीन शिवालयों के दर्शन-पूजन के साथ आस्था के कारवां को आगे बढ़ते रहे।
नगर परिक्रमा में श्रद्धालुओं ने शहर की चारों दिशाओं में विराजमान नगर कोतवाल की मान्यता रखने वाले राजेश्वर महादेव, बल्केश्वरनाथ महादेव, कैलाशनाथ महादेव और पृथ्वीनाथ महादेव के दर्शन कर पूजाअर्चना की। मान्यता है कि इनकी परिक्रमा से नगर पर आने वाली विपत्तियां टलती हैं और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
परिक्रमा मार्ग में रावतपाड़ा स्थित श्री मन:कामेश्वर महादेव, कलक्ट्रेट स्थित रावली और सिकंदरा स्थित वनखंडी महादेव समेत अन्य शिवालयों पर भी श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। जहां शिव मंदिर मिला, वहीं कदम रुके, जल अर्पित किया, माथा टेका और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ यात्रा आगे बढ़ गई।
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छाले पड़े, गिट्टियां चुभीं... नहीं रुके कदम
44 किमी की नगर परिक्रमा श्रद्धालुओं के लिए आस्था के साथ तपस्या भी रही। एमजी रोड पर मेट्रो निर्माण कार्य के कारण कई स्थानों पर रास्ता चुनौतीपूर्ण रहा। प्रतापपुरा चौराहे से कलक्ट्रेट तक गिट्टियां उखड़ी थीं और जगह-जगह गड्ढे थे। शाहगंज में भोगीपुरा, रामनगर पुलिया और अलबतिया होते हुए पृथ्वीनाथ मंदिर तक और वनखंडी महादेव जाने वाले कच्चे मार्ग पर भी नंगे पैर चलना आसान नहीं था।
कई श्रद्धालु मार्ग में कुछ पल रुके। किसी ने पैरों को सहलाया, किसी ने पानी पिया और फिर उठकर उसी रफ्तार से चल पड़ा। पैरो में असहनीय दर्द था, लेकिन किसी ने कोई शिकायत नहीं की और शिवभक्ति में आगे बढ़ते गए। श्रद्धालुओं का कहना था कि भोलेनाथ बुला रहे हैं... परिक्रमा तो पूरी करेंगे। पूरे मार्ग पर यही भाव दिखाई दिया।
जहां थके कदम, वहीं बढ़ा सेवा का हाथ
नगर परिक्रमा सिर्फ आस्था का ज्वार नहीं, सेवा की मिसाल भी बनी। मार्ग में जगह-जगह सेवा शिविर और भंडारे लगाए गए। कहीं श्रद्धालुओं को पूड़ी-सब्जी और छोले-चावल परोसे गए तो कहीं पाव भाजी, फ्रूट चाट, आइसक्रीम और अन्य व्यंजन। चाय, पानी, शर्बत और पेयजल के शिविरों ने थके हुए परिक्रमार्थियों को राहत दी।
सेवा में जुटे लोग हर गुजरते श्रद्धालु को रोककर कहते दिखे कि भोले के भक्त, पानी पी लो... कुछ खा लो। कहीं श्रद्धालुओं के पैरों को सहारा दिया गया तो कहीं फूल बरसाकर स्वागत हुआ। भजनों की धुन पर युवाओं की टोलियां नाचती-झूमती आगे बढ़ती रहीं। डमरू की थाप और जयघोष ने रातभर वातावरण को उत्सव में बदल दिया।
500 से अधिक लगे भंडारे, हर मोड़ पर दिखी सेवा
परिक्रमा मार्ग के विभिन्न हिस्सों में 500 से भंडारे लगाए गए। यह पूरे यात्रा मार्ग में लगाए गए, जिनमें श्रद्धालुओं को भोजन और पेयजल के साथ विभिन्न सुविधाएं निश्शुल्क उपलब्ध करायी गईं। भंडारों के साथ लगे साउंड सिस्टम से गूंजते शिव भजनों ने भी माहौल को भक्तिमय बनाए रखा। रात बढ़ती गई, लेकिन भक्ति का उत्साह कम होने के स्थान पर रात गहराने के साथ और बढ़ता गया।
स्मार्ट कैमरों से निगरानी, पुलिस और स्वास्थ्य टीमें मुस्तैद
नगर परिक्रमा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पुलिस, प्रशासन और नगर निगम की टीमें पूरी रात तैनात रहीं। परिक्रमा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ सफाई और प्रकाश व्यवस्था पर भी ध्यान दिया गया।
स्मार्ट सिटी के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से कैमरों के माध्यम से यात्रा मार्ग की निगरानी की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने मार्ग पर अपनी उपस्थिति बनाए रखी। गर्मी और उमस से परेशान श्रद्धालुओं को जरूरत के अनुसार राहत उपलब्ध कराई गई।
वहीं नगर निगम की ओर से प्रकाश व्यवस्था के लिए करीब 300 अस्थायी लाइटें लगाई गईं। कच्चे और ऊबड़-खाबड़ हिस्सों में बालू और मिट्टी डलवाकर मार्ग को समतल कराया गया। श्रद्धालुओं के विश्राम के लिए करीब 100 लोगों की क्षमता वाला पंडाल बनाया गया, जहां चाय-पानी की व्यवस्था रही। यमुना घाटों पर बैरिकेडिंग कराई गई।
मंदिरों के आसपास अर्पण कलश और डस्टबिन रखे गए, सफाई टीमें परिक्रमा मार्ग पर लगातार सक्रिय रहीं। बल्केश्वरनाथ महादेव मंदिर पहुंचने वाले परिक्रमार्थियों का पुष्पवर्षा कर मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह, नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य समेत नगर निगम अधिकारियों और कर्मचारियों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
महादेव का दरबार में पहुंचकर बरसते पुष्पों के बीच हाथों में जल लिए श्रद्धालु हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए बढ़ते रहे। इसके उनकेथके हुए चेहरों पर भी मुस्कान लौट आई।
भोर हुई... मगर भक्ति की रात नहीं
रात बीतती रही। शहर की कई सड़कें शांत होने लगीं, लेकिन नगर परिक्रमा की डगर पर आस्था का यह कारवां चलता रहा। किसी के पैर थक चुके थे, किसी के कंधे झुक गए थे, लेकिन कदम रुकने को तैयार नहीं थे।
सुबह की पहली किरण के साथ आगरा ने फिर वही दृश्य देखा, नंगे पैर श्रद्धालु, माथे पर भस्म, हाथों में जल और होंठों पर महादेव का नाम। युवाओं की टोलियां, बुजुर्गों के धीमे मगर अडिग कदम... बता रहे थे कि सबकी मंजिल एक थी।
आगरा की नगर परिक्रमा सिर्फ सड़कों पर चलती भीड़ नहीं थी। यह आस्था का चलता-फिरता महाकुंभ थी, जहां पैरों में छाले और दिल में महादेव का नाम था, जिसने मार्ग की मुश्किलों को मन के विश्वास से आसान बना दिया।