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बाबा नीम करौरी की समाधि का रहस्यमय डिजाइन: आगरा के आर्किटेक्ट की कहानी

By Nirlosh Kumar Edited By: Prateek Gupta
Published: Mon, 07 Sep 2026 11:48 PM (IST)

आगरा के आर्किटेक्ट शशि शिरोमणि ने वृंदावन में बाबा नीम करौरी की समाधि का डिजाइन तैयार किया था। यह डिजाइन ...और पढ़ें

वृंदावन में बाबा नीम करौरी के समाधि स्थल पर आगरा के आर्किटेक्ट शशि शिरोमणि।

वृंदावन में बाबा नीम करौरी के समाधि स्थल पर आगरा के आर्किटेक्ट शशि शिरोमणि।

निर्लोष कुमार, आगरा। बाबा नीम करौरी पर आधारित फिल्म हनुमान अंश इन दिनों प्रसिद्धि बटोर रही है। आगरा में भी बाबा नीम करौरी से कई अनुयायी और श्रद्धालु जुड़े हुए हैं। इनमें से एक आगरा आर्किटेक्ट एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष शशि शिरोमणि भी हैं। बाबा का आशीर्वाद उन्हें लगातार मिला।

वृंदावन स्थित आश्रम में बाबा नीम कराैरी की समाधि का डिजाइन उन्होंने ही तैयार किया था। यह डिजाइन हूबहू वैसा ही बना, जैसा बाबा ने उन्हें जीवित रहते समझाया था।

बालगूंज के 90 वर्षीय आर्किटेक्ट शशि शिरोमणि ने बताया कि बाबा की उनके परिवार पर शुरू से ही कृपा रही। वह उनके आवास पर वर्ष 1953 में पहली बार आए थे। उनसे बातचीत होती थी और उनका आशीर्वाद मिलता था। वर्ष 1963-64 में आर्किटेक्ट की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह मुंबई से आगरा वापस लौटे

वह बाबा नीम करौरी के वृंदावन आश्रम जाया करते थे। उनके चमत्कारों के बारे में स्वजन और मित्रों को बताते थे तो कोई सहज विश्वास नहीं करता था। बाबा जब ऋषिकेश में अपना आश्रम बनवा रहे थे, तब उन्होंने वृंदावन स्थित आश्रम में जाकर उनसे सेवा मांगी थी। बाबा को शायद इस नश्वर संसार से जाने का अहसास हो गया था।

उन्होंने कहा कि तेरे लिए बहुत काम है। उन्होंने एक भवन का डिजाइन समझाया और कहा कि बहुत अच्छी तरह से ईमानदारी से इसे बनाना। बाबा से यह उनकी अंतिम भेंट थी। शशि शिरोमणि ने बताया कि 11 सितंबर, 1973 को बाबा का देहावसान हो गया। इसके बाद उनके भक्त आश्रम और समाधि बनवाने को डिजाइन तैयार कराने लगे।

बाबा के भक्त रामनाथ इस काम को देख रहे थे। किसी ने उनको मेरा नाम सुझाया तो उन्होंने मुझे मिलने के लिए बृलाया। वह आगरा से मोटरसाइकिल से उनसे मिलने गए। रामनाथ आश्रम से कहीं जा रहे थे, लेकिन उनकी कार गड्ढे में फंस गई। इससे वह नहीं जा पाए और उनसे उनकी मुलाकात संभव हो पाई

उन्होंने इसके बाद डिजाइन तैयार किया। यह वैसा ही बना, जैसा कि बाबा ने उन्हें समझाया था। देश में आपातकाल लागू होने से पूर्व ही समाधि बनकर तैयार हो गई। आर्किटेक्ट शशि शिरोमणि ने बताया कि बाबा को जब बुलाना होता है, तब वह बुला लेते हैं। साेमवार को भी वृंदावन स्थित बाबा की समाधि के दर्शन उन्होंने किए।