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कम टावर्स में मिलेगा बेहतर 5G नेटवर्क! सरकार ने बढ़ाई रेडिएशन लिमिट, ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के बराबर हुए नियम: रिपोर्ट

Published: Sat, 29 Aug 2026 05:39 PM (IST)

बढ़ते 5G ट्रैफिक और सर्विस क्वालिटी को बेहतर करने के लिए सरकार ने मोबाइल नेटवर्क्स के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) ...और पढ़ें

सरकार ने दोगुनी की 5G टावर्स की EMF लिमिट। Photo- ChatGPT.

सरकार ने दोगुनी की 5G टावर्स की EMF लिमिट। Photo- ChatGPT. 

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। बढ़ते 5G ट्रैफिक के बीच सर्विस क्वालिटी बेहतर करने के इरादे से सरकार ने मोबाइल नेटवर्क्स के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) की लिमिट को बढ़ाकर ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के बराबर कर दिया है। इससे टेलीकॉम ऑपरेटर्स कम टावरों के जरिए बड़े इलाके को कवर कर सकेंगे। ये जानकारी सोर्सेज के हवाले से ET ने अपनी एक रिपोर्ट में दी है।

रिवाइज्ड EMF या रेडिएशन नियम, जो अगले महीने से लागू होंगे, 5G बेस टावर स्टेशन (BTS) के लिए तय पावर डेंसिटी को मौजूदा 5 वॉट से दोगुना करके 10 वॉट प्रति स्क्वायर मीटर कर देंगे। सूत्रों का कहना है कि इससे सिग्नल्स को ज्यादा दूरी तय करने में मदद मिलेगी, जिससे सर्विस प्रोवाइडर्स हर एक साइट से कवरेज बढ़ा सकेंगे और नेटवर्क एक्सपांशन की लागत घटा सकेंगे।

EMF लिमिट्स ये तय करती हैं कि कोई मोबाइल नेटवर्क इक्विपमेंट मैक्जिमम कितनी रेडियो-फ्रीक्वेंसी एनर्जी एमिट कर सकता है।

नियमों में ये ढील टेलीकॉम इंडस्ट्री की लंबे समय से चली आ रही मांग थी। कंपनियों की दलील थी कि पुरानी लिमिट्स की वजह से 5G नेटवर्क की कवरेज प्रभावित हो रही थी।

मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, '5G और आने वाली नई टेलीकॉम टेक्नोलॉजीज को देखते हुए ये बदलाव बेहद जरूरी था।'

इस पूरे मामले की पुष्टि के लिए डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन्स (DoT) को भेजी गई क्वेरी का कोई जवाब नहीं पब्लिकेशन को नहीं मिला है।

Netwrk ChatGPT (2)

सूत्रों के मुताबिक, ये कदम खासतौर पर Vodafone Idea के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है, जो अभी अपनी 5G सर्विस रोल आउट करने के प्रोसेस में है और अब हायर लिमिट्स के आधार पर अपने नेटवर्क की प्लानिंग कर सकती है।

वहीं Bharti Airtel और Reliance Jio, जो पहले ही अपना ज्यादातर 5G नेटवर्क तैयार कर चुके हैं, उन्हें भी एडिशनल कैपेक्स कम करने और मौजूदा साइट्स का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल करने में फायदा मिलने की उम्मीद है।

भारत कई सालों से इंटरनेशनल कमीशन ऑन नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन प्रोटेक्शन (ICNIRP) द्वारा तय सिफारिशों से काफी ज्यादा सख्त रेडिएशन नॉर्म्स फॉलो कर रहा था। ICNIRP ही वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) और सरकारी एजेंसियों को EMF के सेहत और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर सलाह देता है।

उदाहरण के लिए, भारत में पहले 1 वॉट प्रति स्क्वायर मीटर की पावर डेंसिटी का नियम लागू था, जिसे पिछले साल बढ़ाकर 5 वॉट किया गया था, जबकि ICNIRP की सिफारिश 10 वॉट की थी।

टेलीकॉम कंपनियां उन स्टडीज का हवाला देते हुए इन नियमों को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के बराबर लाने की मांग कर रही थीं, जिनमें दिखाया गया है कि वायरलेस टेक्नोलॉजीज से सेहत पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। नया 10 वॉट का नियम दुनिया के करीब 137 देशों के नॉर्म्स के बराबर है, जिनमें ज्यादातर यूरोपियन यूनियन के देश, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, साउथ कोरिया और सिंगापुर शामिल हैं।

टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि पुराने EMF नियम 2G, 3G या 4G के लिए तो कुछ हद तक ठीक थे, लेकिन स्टैंडर्ड्स में बड़े अंतर की वजह से 5G के लिए वे प्रैक्टिकल नहीं रह गए थे।

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