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    'धनंजय' से लेकर 'सव्यसाची' तक: महायोद्धा अर्जुन के 10 अद्भुत नाम और उनके गहरे अर्थ

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 11:30 AM (GMT+05:30)

    महाभारत के महायोद्धा अर्जुन के 10 प्रसिद्ध नाम इसमें प्रत्येक नाम के पीछे की कहानी और उसके अर्थ को विस्तार से पढ़िए। ...और पढ़ें

    महाभारत के महायोद्धा अर्जुन के 10 प्रसिद्ध नाम (AI Image)

    महाभारत के महायोद्धा अर्जुन के 10 प्रसिद्ध नाम (AI Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत के विराट पर्व से जुड़ा किस्सा हम सभी को याद है, जब पांडु पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर अपने चारों भाईयों और रानी द्रौपदी के साथ मत्स्य देश में एक साल तक अज्ञातवास किया था। इस दौरान महापराक्रमी भीमसने ने द्रौपदी के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले कीचक और उसके बंधुओं को मार गिराया था।

    एक वर्ष के अज्ञातवास के दौरान पांचों पांडव और द्रौपदी नाम और भेष बदलकर मत्स्य देश में रह रहे थे। जहां युधिष्ठिर का नाम कंक, भीम बल्लव, अर्जुन बृहन्नला, नकुल ग्रंथिक, सहदेव तंतिपाल और द्रौपदी सैरिंध्री के नाम से रह रही थी। लेकिन क्या आपको पता है कि, अर्जुन के 10 अतिरिक्त ऐसे नाम हैं, जो महाभारत काल में काफी प्रसिद्ध हुए।

    अर्जुन के 10 नाम ये हैं

    धनंजय

    अर्जुन का यह नाम अपार धन से जुड़ा है। महाभारत काल में कई जगह अर्जुन को धनंजय कहकर भी संबोधन किया गया।

    विजया

    ऐसा व्यक्ति जो युद्ध में हमेशा जीतता है, जो अजेय राजाओं को भी परास्त करने की क्षमता रखता है।

    श्वेतवाहन

    बर्फ की तरह सफेद घोड़ों पर सवार योद्धा, सोने की परत चढ़े कवच के साथ विराजते हैं। बर्फ की तरह सफेद घोड़े चरित्र की पवित्रता का प्रतीक माने जाते हैं।

    फाल्गुन

    दुश्मनों का अंत करने वाले उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में जिसका जन्म हुआ है।

    किरीटी

    महाभारत काल में अर्जुन का ही एक अन्य नाम किरीटी था। स्वर्ग के राजा इंद्र ने निवातकवाच नाम के पाताल लोक के शक्तिशाली राक्षसों के नाश के बाद उनके सिर पर एक तेजस्वी मुकुट पहनाया। माना जाता है कि, ये राक्षस अजेय थे और इंद्र के द्वारा भी पराजित नहीं किए जा सकते थे।

    विभत्सु

    वह इंसान जो कभी भी अपने लिए अनुचित काम नहीं करता है।

    सव्यसाचिन

    अर्जुन का यह नाम उनकी कुशल धनुर्धर विद्या को देखते हुए रखा गया था। इस नाम का अर्थ है कि, वह योद्धा जो दोनों हाथों से समान सहजता से धनुष की डोरी खींच सकता था।

    जिष्णु

    वह व्यक्ति जिसमें अदम्य साहस, उच्च और अतुलनीय आदर्श हो, जो दुश्मनों को पराजित करने की क्षमता रखता हो।

    पार्थ

    माता कुंती का पुत्र जिसे पृथा भी कहा जाता है, वहीं से अर्जुन का यह नाम पड़ा।

    अर्जुन

    ऐसा व्यक्ति जो निष्कलंक, पवित्र और नेक कामों को करने वाला होता है।

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