ईश्वर ने किसी को अमीर तो किसी को गरीब क्यों बनाया? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया इसका उत्तर
संसार में व्याप्त अमीरी-गरीबी जैसी असमानता ईश्वर की नहीं, बल्कि व्यक्ति के कर्मों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि अच्छे ...और पढ़ें

क्यों है दुनिया में अमीरी और गरीबी का अंतर (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। इस संसार को भले ही ईश्वर ने क्यों न बनाया हो, लेकिन फिर भी हर कोई एक-दूसरे से अलग है। आचरण और स्वभाव में अलग होना तो आम है, लेकिन कोई व्यक्ति बहुत अमीर है, तो कोई बहुत ज्यादा गरीब। कोई खुश है तो कोई परेशान। जीवन में कई उतार-चढ़ाव तो आते ही रहते हैं, लेकिन व्यक्तियों में अमीरी गरीबी जैसी असमानता भला क्यों है?
हम सभी के मन में ऐसे ख्याल कभी न कभी जरूर आते होंगे और हम आस-पास इसका जवाब भी खोजते होंगे। दरअसल, लोगों के बीच इस तरह की असमानता व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों का ही फल होती हैं।
ऐसा ही एक सवाल प्रेमानंद जी महाराज ने उनसे भक्त से भी किया कि 'इस संसार में असमानता क्यों रखी गई है, किसी को बहुत बुद्धि बल और धन दिया गया है किसी को कम दिया गया है। ' आइए आपको बताते हैं प्रेमानंद जी ने इस सवाल का उत्तर देते हुए भक्त से क्या कहा है।
संसार में लोगों के बीच असमानता क्यों है?
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि जो भगवान ने दिया है वो समान दिया है, लेकिन आपके कर्म अलग-अलग हैं। जो आपने कर्म किए हैं उसका फल असमान है और आपकी योग्यता के अनुसार ही कर्मों का फल भी निर्धारित हैं।
अच्छे कर्म करने वाले धनी हैं और बुरे कर्मों वाले निर्धन। इस संसार में जो कुछ भी होता है वो व्यक्ति के कर्मों का फल ही होता है। ऐसे ही पाप कर्म करने वाला व्यक्ति हमेशा दुखी और पुण्य कर्म करने वाला सुखी रहता है।
सांसारिक असमानता कर्मों का फल
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि जितना विश्व रचा गया है वो कर्म प्रधान ही रचा गया है। एक कहावत भी है 'कर्म प्रधान विश्व रच राखा और जो जस करे तासी फल चाखा।' इसका मतलब यह है कि 'विश्व की रचना कर्मों के अनुसार ही हुई है और जो जैसा कर्म करता है उसे उसका वैसा ही फल मिलता है। इसमें भगवान का क्या दोष है? इसमें भगवान की क्या बात है? जो जैसा कर्म कर रहा है वैसा ही फल मिल रहा है और उसको वो भोग रहा है।
दान-पुण्य करने वाला अमीर होता है
इस संसार में बहुत अच्छे कर्म करने वाला और दान पुण्य करते हुए गरीबों की सेवा करने वाला करोड़ों रुपए का लाभ प्राप्त कर रहा है। वहीं जो दूसरे के साथ बेईमानी कर रहा है, चोरी करना और कई प्रकार के कुकर्म करता है उसे उसका फल जरूर मिलता है।
ऐसे व्यक्ति को खाने को भी नहीं मिल रहा है तो ये सिर्फ कर्म का योग है। प्रेमानंद जी बताते हैं कि जैसे कर्म करोगे वैसा फल देगा भगवान। यहां संसार में विषमता है कर्मों के कारण से क्योंकि सब एक जैसे कर्म नहीं कर रहे हैं और सब अलग-अलग कर्म कर रहे हैं। उसी वजह से कर्मों का अलग-अलग दंड या पुरस्कार मिल रहा है।
वास्तव में अमीरी और गरीबी आपके कर्मों का ही फल होता है, किसी भी परिस्थिति और असमानता के लिए ईश्वर को जिम्मेदार नहीं कहा जा सकता है।
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